गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि चिकित्सा पद्धति से संपूर्ण स्वास्थ्य के क्षेत्र में जो काम हुआ उसमें आयुर्वेद का महत्वपूर्ण स्थान है। पहला मेडिकल टूरिज्म आयुर्वेद से ही आया। आयुर्वेद में उत्तर भारत कोई खास पहचान नहीं बना सका है। इस जयंती पर यह संकल्प लेने की जरूरत है कि दक्षिण भारत की तरह ही उत्तर भारत में भी आयुर्वेद को चिकित्सा का मुख्य जरिया बनाएंगे। यह काम आयुर्वेद चिकित्सक ही कर सकते हैं।
दो दिवसीय (4-5 नवंबर) दौरे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को देर शाम गोरखनाथ मंदिर आए। वह सीधे हरिद्वार से गोरखपुर आए, फिर गुरू गोरखनाथ आयुर्वेद चिकित्सालय में आयोजित धनवंतरि जयंती समारोह में हिस्सा लेने पहुंचे। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के पास ज्ञान, विज्ञान का अथाह सागर है पर हम इसका उपयोग सही से नहीं कर पाए।
स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में जो बात करते हैं उन्हें बता दें कि पिछले साढ़े चार सालों में जो कार्य हुआ वह बहुत ही सराहनीय है। आयुर्वेद के क्षेत्र में कुछ नया करने की जरूरत है। इससे जुड़े चिकित्सकों को और कोशिश करनी पड़ेगी। ऐसा हुआ तो गरीब, वंचित सस्ते में इलाज करा सकेंगे। आयुर्वेदिक दवाएं भी कारगर होती हैं। इसे उपयोगी बनाकर आम आदमी से जोड़ने की जरूरत है। सरकार अपना कार्य कर रही है पर निजी चिकित्सकों और आयुर्वेद से जुड़े लोगों को और व्यापक स्तर पर काम करने की जरूरत है। अब आयुर्वेद जड़ता का शिकार है। इससे जुड़े चिकित्सक ही खुद को आयुर्वेद से अलग करने की कोशिश करते हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को धनतेरस की बधाई दी है।