देवरिया(सुधीर श्रीवास्तव)। जिला जेल में 530 बंदियों की क्षमता के सापेक्ष वर्तमान में 1564 बंदी हैं। इसमें से 110 महिलाएं हैं। इससे में 918 कैदी कुशीनगर जिले के हैं। क्षमता से अधिक बंदियों की रखवाली जेल प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। खासकर छुट्टियों के दिनों में, इस दिन मुलाकातियों की संख्या बढ़ जाने से समस्या जटिल हो जाती है। इसके बावजूद जेल रक्षकों और नंबरदारों की बदौलत बंदियों की पल-पल की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। देवरिया जिला जेल का निर्माण 1952 में हुआ था। पहले कुशीनगर, देवरिया का ही अंग था। कुशीनगर में जिला जेल का निर्माण न हो पाने के कारण यहां के कैदी भी देवरिया जिला जेल में रखे जाते हैं। जेल में 17 बैरक हैं। हर बैरक की क्षमता 30 बंदियों की है। मगर बंदियों की संख्या में इजाफा के कारण हर बैरक में क्षमता से अधिक बंदी हैं। ऐसे में जिस बंदी को जहां जगह मिला वहीं कंबल बिछाकर रात गुजार लेता है। गर्मी में पंखे के नीचे लेटने को लेकर अक्सर बंदियों के बीच तू-तू, मैं-मैं होती रहती थी। जेलर वीके त्रिवेदी ने बताया कि जेल में इन दिनों देवरिया के 542 विचाराधीन और 97 कैदी हैं। कुशीनगर के 827 विचाराधीन और 91 कैदी बंद हैं। उन्होंने बताया कि 100 बंदी काफी बुजुर्ग हैं। इन्हें अलग बैरक में रखा गया है, ताकि समय-समय पर इनकी देखभाल हो सके। उन्होंने बताया कि जेल में बंद पूर्व सांसद अतीक से प्रतिदिन पांच से छह लोग मिलने आते हैं। पूर्व सांसद से भी अन्य बंदियों की तरह व्यवहार किया जाता है।
पूर्व सांसद के पास लगी थी मुलाकातियों की भीड़
जिला जेल में पूर्व सांसद अतीक अहमद भी बंद हैं। रविवार को उनसे मिलने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। आम बंदी मुलाकात एरिया में अपनों से मिलते हैं, लेकिन अतीक के लिए जेल अधीक्षक कक्ष से सटे बरामदे बेंच और कुर्सी पड़ी थी। अतीक कुर्सी पर बैठे थे तो उनसे मुलाकात करने वाले बेंच पर विराजमान थे। सूत्रों का कहना है कि अतीक से मिलने वालों की रोज भीड़ लगती है। जेल में अतीक नेता के नाम से मशहूर हैं। जेल से बाहर सपा झंडा लगी खड़ी दूसरे जिलों की लग्जरी गाड़ियां, यह संकेत दे रही थीं कि अतीक से मिलने दूर-दराज के लोग भी आते हैं।
प्रतिदिन औसतन 160 मुलाकाती
जेल में शनिवार को मुलाकात पर रोक है। बाकी दिन जेल में बंद अपनों से मिलने की इजाजत है। रविवार को अवकाश के दिन मुलाकातियों का रेला लगा रहा है। जितने मुलाकाती जेल के भीतर थे, उससे कहीं अधिक बाहर इंतजार कर रहे थे। भीड़ होने पर शिफ्टवार मुलाकातियों से भेंट कराई जाती है। जेल कर्मियों की मानें तो रोज 160 से 170 मुलाकाती आते हैं। अवकाश के दिनों में इनकी संख्या में दोगुना हो जाती है।
बंदियों के लिए 400 नए कंबल
बंदियों के लिए 400 नए कंबल आ गए हैं। अब कंबलों की संख्या 3892 हो गई है। प्रत्येक बंदी या कैदी को तीन कंबल दिए जाते हैं। कंबलों की कमी के कारण बंदियों की ठंड की रात काटनी मुश्किल हो गई थी। जेलर वीके त्रिवेदी ने बताया कि एक सप्ताह पहले 400 नए कंबल आए हैं। बंदियों में कंबल बांट दिए गए हैं।