नए साल से घर समेत कई निर्माण में बालू कमी की समस्या दूर हो जाने की उम्मीद है। नई खनन नीति के तहत जिले के 43 जगहों पर बालू खनन के लिए मंजूरी मिली है। जिला प्रशासन इन जगहों पर खनन पट्टा स्वीकृत करने के लिए ई-टेंडर भी निकाल चुका है। तीन दिसंबर को दो दिवसीय दौरे पर शहर आए सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी प्रवास के दौरान जिले के अधिकारियों को नई खनन नीति के अनुसार ई-टेंडरिंग के जरिए खनन की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए थे। खनन पर सख्ती की वजह से बाजार में बालू की बिक्री बहुत कम हो गई थी, जिस वजह से इसके दाम काफी बढ़ गए थे।
उधर प्रदेश सरकार के ट्वीटर हेंडल /@cmoffice.up पर भी कहा गया कि राज्य सरकार की प्राथमिकता जनता को पूरी पारदर्शिता के साथ कम दामों में सहजता से खनिज एवं खनन उत्पाद उपलब्ध कराना है। इसमें किसी भी प्रकार की देर, शिथिलता या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं होगा। संलिप्त अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसी ट्वीट में सोमवार को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) प्रिंसिपल बेंच नई दिल्ली के राज्य सरकार के पक्ष में आए निर्णय को बड़ी उपलब्धि भी बताया गया है। खनन विभाग ने जिले में खनन के लिए रायल्टी की दर 65 रुपये प्रति घन मीटर तय की है। जिला खनन अधिकारी रंजीत निर्मल ने बताया कि खनन के लिए ई-टेंडर निकाला गया है। नियमानुसार टेंडर की प्रक्रिया पूर्ण कर खनन का कार्य जल्द शुरू कराया जाएगा।
गोला के घाघरा नदी क्षेत्र में सर्वाधिक 29 साइट
सर्वे के तहत खनन के लिए जिले के जिन 43 साइट खनन के लिए चुने गए हैं, उनमें सर्वाधिक 29 स्थान गोला तहसील के घाघरा नदी क्षेत्र के हैं। इसी तरह बांसगांव में राप्ती नदी क्षेत्र के दो, खजनी तहसील के घाघरा नदी क्षेत्र के तीन, कैंपियरगंज में राप्ती के पांच तथा सदर तहसील में राप्ती क्षेत्र के चार साइट का चयन हुआ है, जहां बालू खनन के लिए ई-टेंडर निकाला गया है।
सीसीटीवी से होगी खनन की निगरानी
जिले में बालू खनन की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए खनन वाले क्षेत्र की निगरानी सीसीटीवी कैमरे से की जाएगी। पट्टा लेने वाले व्यक्ति को ही सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे। इसका कंट्रोल कमांड सेंटर कलेक्ट्रेट में बनेगा, जहां से प्रशासनिक अफसर मौके पर हो रहे खनन पर नजर रखेंगे। खनन का पट्टा लेने वाले व्यक्ति को अपना एक महीने का डेटा, रिकार्ड के तौर पर रखना होगा।