सिद्धार्थनगर। जिला पंचायत फिर से सुर्खियों में है। कारण कि जिम्मेदारों ने 288 परियोजनाओं के टेंडर बिना एस्टीमेट बनाए ही प्रकाशित करा दिए। आनन-फानन में इसकी कवायद शुरू हुई। रविवार को छुट्टी के दिन भी अभियंता व कर्मी एस्टीमेट बनाने में जुटे रहे। दफ्तर खुलने की सूचना पर मीडिया पहुंची तो सभी दफ्तर छोड़कर खिसक लिए। वहीं इस मामले पर संज्ञान लेते हुए डीएम ने जांच कमेटी गठित कर दी है। बिना एस्टीमेट टेंडर प्रकाशित करने को लेकर जिला पंचायत के जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
शासकीय अनुदान से कार्य कराने के लिए जिला पंचायत ने 288 परियोजनाओं के लिए शनिवार को टेंडर प्रकाशित कराए थी। इसमें 38 परियोजनाएं गड्ढा मुक्ति की हैं। जबकि शेष 250 नए कार्य हैं। नियमों के तहत बिना एस्टीमेट के कोई टेंडर नहीं हो सकता। एस्टीमेट को आधार बनाकर ही कोई संस्था ठेकेदारों से टेंडर मांगती है। इससे इतर जिला पंचायत ने मनमानी करते हुए बिना इस्टीमेट के ही सभी कार्यों के टेंडर बुला लिए हैं। शनिवार को मामला सांसद-विधायक के संज्ञान में लाया गया तो उन्होंने अफसरों से जवाब-तलब किया। दफ्तर बंद होने का हवाला देकर उन्होंने सोमवार तक मामले को टाल दिया। इस बीच गुपचुप तरीके से इस्टीमेट बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है। रविवार को जिला पंचायत के अभियंताओं व संबंधित कर्मचारियों की छुट्टी कैंसिल कर अचानक से दफ्तर बुला लिया गया। अफसरों ने उन पर तत्काल एस्टीमेट बनवाने का दबाव दिया। कोशिश शुरू भी हुई, इस बीच खबर मीडिया तक पहुंच गई। कई सदस्य भी जिला पंचायत में धमक पड़े। नतीजा कर्मचारी दफ्तर से खिसक लिए।
सूत्रों के मुताबिक सोमवार सुबह तक एस्टीमेट तैयार करने के लिए एएमए विभागीय अभियंताओं व पटल सहायक के साथ गोपनीय स्थान पर डटे हुए हैं। डीएम कुणाल सिल्कू ने कहा कि शिकायत के आधार पर टेंडर को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। सीडीओ के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी को जांच सौंप दी गई है। अगर बिना इस्टीमेट या किसी भी तरह नियमों की अनदेखी कर टेंडर प्रकाशित किया गया है तो जांच के बाद जिम्मेदारों को बख्शा नहीं जाएगा। डुमरियागंज विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने भी मामले से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया। कहा कि बिना एस्टीमेट निविदा कराना सरासर गलत है। अध्यक्ष व एएमए मिलीभगत कर गड़बड़ी की कोशिश कर रहे हैं। टेंडर को निरस्त कराया जाएगा।
सरकारी दर स्वीकृत नहीं, फिर भी प्रकाशित कराया टेंडर
टेंडर प्रकाशन में भी गड़बड़ी की गई है। बड़े अखबारों की अनदेखी कर कुछ ऐसे समाचार पत्रों में भी टेंडर प्रकाशित कराए गए हैं, जिनके अब तक सरकारी दर ही स्वीकृत नहीं है। नियमों के तहत सरकारी विज्ञापन का प्रकाशन स्वीकृत डीएवीपी दर पर ही होना है। जिन अखबारों के लिए यह दर तय ही नहीं है, उनमें टेंडर का प्रकाशन भी वित्तीय अनियमितता की मंशा को उजागर करता है।
डुमरियागंज में 32 काम, उसका में सिर्फ चार
परियोजनाओं में भी क्षेत्रवाद हावी है। अध्यक्ष के गृह क्षेत्र डुमरियागंज की 32 परियोजनाएं स्वीकृत हुईं, जबकि अन्य 13 ब्लाकों में गिनती के कार्य दिए गए हैं। 54 ग्राम पंचायतों वाले उसका ब्लॉक में सिर्फ चार परियोजनाएं ही स्वीकृत हैं। वार्ड संख्या 43 से निर्वाचित सदस्य मो.उमर, वार्ड संख्या 45 से निर्वाचित किसमाती देवी और वार्ड संख्या दो की श्रीमति देवी के क्षेत्र में एक भी परियोजना मंजूर नहीं हुई है। डुमरियागंज में स्वीकृत प्रस्तावों में 19 अध्यक्ष गरीबदास चिनकू और 8-8 कार्य सपा नेता चिनकू यादव की पत्नी पूजा यादव व भाई दीनेंद्र दत्त यादव के क्षेत्र के हैं। सदस्य मो.उमर, श्रीमति व किसमाती के प्रतिनिधि मुनिराम ने आरोप लगाया कि डुमरियागंज क्षेत्र की 32 परियोजनाएं ऐसी हैं, जिनकी पहचान हुई है। कई परियोजनाओं में ब्लॉक व गांव का नाम छिपा दिया गया है।