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सवालों की बौछार, सरकार लाचार

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अरुण चन्द
गोरखपुर।
मेडिकल कॉलेज में कुछ घंटों के भीतर 50 से ज्यादा मौत और ऑक्सीजन सप्लाई में बाधा से उठते सवालों के सीधे जवाब न अफसरों के पास हैं और न ही सरकार के नुमाइंदों के। आंखों के सामने अपनों को मरते देख गम और गुस्से में घिरे लोगों को काबू करने के लिए राज्य सरकार के दो मंत्रियों (सिद्धार्थ नाथ सिंह और आशुतोष टंडन) ने शनिवार को जांच-पड़ताल की औपचारिकता के बीच प्रिंसिपल राजीव कुमार मिश्रा के निलंबन का एलान तो कर दिया। लेकिन मीडिया और दुखी तीमारदारों के बीच से उठे कई सवालों के सीधे जवाबों से भी वह बचते नजर आए।
बृहस्पतिवार से बीआरडी मेडिकल कॉलेज में लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित होने के कुछ घंटों के बाद से शुरू हुए बच्चों और मरीजों की मौत के सिलसिले पर सरकार के नुमाइंदों ने सिलेंडर से ऑक्सीजन सप्लाई का विकल्प गिनाया। यह भी दावा किया कि ऑक्सीजन की क्राइसिस से किसी की जान नहीं गई लेकिन यह साफ नहीं किया कि अगर ऑक्सीजन की किल्लत बड़ा मुद्दा नहीं थी तो मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल को निलंबित करने का निर्णय क्यों लेना पड़ा।
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यह भी स्पष्ट नहीं हुआ कि ऑक्सीजन की क्राइसिस, सप्लाई कर्ता कंपनी के भुगतान के उलझाव जैसा गंभीर मुद्दा नौ अगस्त को मुख्यमंत्री की मौजूदगी में चली मेडिकल कॉलेज के कामधाम की समीक्षा और मुआयने का हिस्सा क्यों नहीं बना। स्थानीय अफसरों से लेकर सीएम के साथ आए शासन के नुमाइंदों और राजनीतिज्ञों के एजेंडे में मेडिकल कॉलेज के लाइफ सपोर्ट सिस्टम की क्रॉस चेकिंग का बिंदु क्यों नहीं शामिल था।
सवाल यह भी है कि बिना पोस्टमार्टम के मौत की ठोस वजह जाने बिना सरकारी नुमाइंदे ऑक्सीजन की कमी से किसी की मौत न होने का दावा इतनी मजबूती से कैसे कर रहे हैं। एकाएक मौत का आंकड़ा बढ़ने पर वजह जानने के लिए पोस्टमार्टम जैसे सटीक और साइंटिफिक तरीके की अनदेखी क्यों की गई।
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लोगों के बीच से एक बड़ा और गहरा सवाल यह भी उठ रहा है कि स्वास्थ्य मंत्री ने पूर्व के वर्षों में अगस्त में मेडिकल कॉलेज में हुई मौतों (अगस्त 2014 में प्रतिदिन 19 मौतें, अगस्त 2015 में 22 और अगस्त 2016 में करीब 19 मौतें) के आंकड़े गिनाकर अगस्त को जान जाने के लिहाज से ज्यादा संवेदनशील तो साबित किया लेकिन इस पर नहीं बोले की अगस्त की इस संवेदनशीलता से निपटने और मासूमों की जान बचाने के लिए सरकार या स्थानीय स्तर पर मजबूत होमवर्क क्यों नहीं हुआ।
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