गोरखपुर। यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने का वादा करने वाला रेलवे ट्रेन के स्लीपर कोच की खराब सीटों से बेखबर है। कई ट्रेनों में पुरानी होने के चलते सीटें मानक के हिसाब से सही नहीं हैं। आकार बेतरतीब हो गई है और उबड़-खाबड़ सीटों पर सोकर लंबी दूरी की यात्रा करने से यात्री को जहां ज्यादा थकान महसूस होती है, वहीं पीठ व गर्दन दर्द की बीमारी भी हो सकती है।
रेलवे की ओर से कोच के मेंटेनेंस की अवधि भी तय है। इस दौरान कोच की सीटों को भी चेक किया जाता है। जो सीटें समतल नहीं होती हैं, उन्हें दुरुस्त करने का प्रावधान है। हालांकि कोच की कमी और काम में लापरवाही के चलते बिना मरम्मत वाले कोच को भी ट्रेनों में लगा दिया जाता है। चिकित्सक भी ऐसी सीटों पर लगातार सफर करने को खतरनाक मानते हैं। शनिवार को काठगोदाम से हाबड़ा जाने वाली बाघ एक्सप्रेस के स्लीपर कोच एस 4 की कई सीटें धंसी हुई थीं। खिड़की की बगल वाली सीट संख्या 8 और 16 इस तरह नीचे की ओर दबी थी कि उस पर अगर यात्री सोए तो शरीर में दर्द हो सकता है। ट्रेन से सफर करने वाले नंदानगर के चंदर यादव ने बताया कि लखनऊ से गोरखपुर की यात्रा मुश्किल हो गई। स्लीपर की सीट समतल नहीं थी। बैठने में ही दिक्कत महसूस हुई। स्लीपर कोच में यात्रा का अनुभव बहुत खराब रहा है।
गोरखपुर से गुजरने वाली ट्रेनें : 165
मेल व एक्सप्रेस : 135
पैसेंजर ट्रेन : 27
डेमू : 03
सीटों को भी समय-समय पर चेक कराया जाता है। पूर्वोत्तर रेलवे की ट्रेनों में ऐसी शिकायत नहीं आई है। अगर सीटें खराब हैं तो यात्री इसकी जानकारी कंट्रोल रूम के नंबर 9794846980 दें। इंतजाम को ठीक कराया जाएगा।
- संजय यादव, सीपीआरओ एनईआर
चिकित्सक की सलाह
साइड खिड़की वाली सीट में गैप नहीं होना चाहिए। इस तरह के गैप व जो सीटें समतल नहीं हैं, उन पर ज्यादा देर तक सोने से कमर में दर्द और रीढ़ की हड्डी का डिस्क खिसकने की आशंका बनी रहती है।
- डॉ इमरान अख्तर, हड्डी रोग विशेषज्ञ
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