गोरखपुर। विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती समारोह के तहत आयोजित रूपांतर उत्सव में कोलकाता के कलाकारों ने समाज में महिलाओं की स्थिति और उनकी इच्छाशक्ति पर आधारित नाटक ‘आत्मज’ का मंचन किया। हिंदी विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय इस उत्सव में रविवार को भी विभिन्न नाटकों का मंचन होगा।
संवाद भवन में शनिवार की शाम नाटक का निर्देशन कोलकाता नाट्य संस्था रंगकर्मी की उषा गांगुली ने किया। नाटक की कहानी की मुख्य पात्र नंदिनी ठाकुर डॉक्टर है। दूसरी जाति के युवक साथ प्रेम और फिर शादी के बाद उसे माता-पिता और समाज का बहिष्कार झेलना पड़ता है। इसी बीच वह गर्भवती हो जाती है। समाज की परवाह किए बगैर नंदिनी बच्चे को जन्म देती है। लंबे संघर्ष के बाद आखिर समाज उसे स्वीकार कर ही लेता है। नाटक में करुणा ठाकुर, तृप्ति मिश्रा, प्रभा तमंग, श्रवनी प्रमाणिक, कृष्णा सोनिका, स्मृति बनर्जी, मान्या, सुमिता पात्रा, अमित कुमार भगत, निकुंज दगा, निलाब्जो मंडल, प्रदीप सोनकर, अनिरुद्ध सरकार, शंकर देय, दशरथ दास, दीप मित्रा आदि कलाकारों ने बेहद सधा अभिनय किया। डॉ गीता सरकार, सुदीप सान्याल, शंकर देय, दीप मित्रा, दीप मिश्रा, स्नेहाशीष कर्मकार, अनिरुद्ध कर्मकार ने सहयोग किया।
रूपांतर महोत्सव में शनिवार को संस्था की तरफ से 50 वर्षों में हासिल उपलब्धियों से संबंधित चित्र प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसका उद्घाटन वैज्ञानिक व शायर गौहर रजा ने किया। प्रो रामदेव शुक्ल, प्रो विनोद सोलंकी, प्रो अनिल राय ने रूपांतरण की स्मारिका का विमोचन किया। अतिथियों का स्वागत संस्था की अध्यक्ष डॉ अमृता जयपुरियार, संचालन हरि प्रताप त्रिपाठी व अपर्णेश मिश्र ने किया।