गोलघर काली मंदिर में पूजा करते श्रद्धालु।
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वासंतिक नवरात्र के चौथे दिन लोगों ने मां कुष्मांडा की आराधना की। मंदिरों में भीड़ रही। बड़ी संख्या में श्रद्धालु लेहड़ा देवी, बुढ़िया माई, तरकुलहा देवी आदि स्थानों पर मां के दर्शन-पूजन के लिए पहुंचे। घरों पर भी लोगों ने दुर्गा सप्तशती का पाठ करके मां की विधिविधान से उपासना की।
देवी मंदिरों पर सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं की भीड़ नजर आई। लोगों ने मां को नारियल-चुनरी चढ़ाकर मंगलकामना की। ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश पांडेय ने बताया कि अपनी मंद हंसी से ब्राह्मांड को उत्पन्न करने के कारण मां दुर्गा के चौथे स्वरूप को कुष्माण्डा नाम से अभिहित किया गया है। जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, चारों तरफ अंधकार व्याप्त था, तब देवी ने ब्राह्मांड की रचना की थी। इस दृष्टि से यही सृष्टि की आदि स्वरूपा, आदि शक्ति हैं। इनका निवास सूर्यमंडल के भीतर के लोक में है।
महानिशा पूजन 24 को
ज्योतिषाचार्य पंडित शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि 24 मार्च को सप्तमी दिन में 9:26 बजे तक है। तत्पश्चात अष्टमी तिथि है। रात्रि में अष्टमी तिथि होने से यही दिन महानिशा पूजन के लिए ठीक है।
महाष्टमी एवं महानवमी एक दिन
ज्योतिषाचार्य राकेश पांडेय ने बताया कि 25 मार्च को अष्टमी प्रात: 7:04 बजे तक है। तत्पश्चात नवमी संपूर्ण दिन और रात्रिशेष 4:39 बजे तक है। इस वजह से अष्टमी तथा नवमी दोनों व्रत 25 मार्च को ही किया जाएगा। निर्णयामृत के अनुसार नवमी युक्त महाष्टमी और अष्टमी युक्त नवमी देवी पूजन में अत्यंत प्रशस्त मानी जाती है। 25 मार्च को ही रामनवमी का पर्व भी मनाया जाएगा।