नजर कमजोर होने की बड़ी वजह समलबाई (ग्लूकोमा) है। आंखों की रोशनी गंवाने वाले सात फीसदी लोग ग्लूकोमा के शिकार होते हैं। इसके लक्षण काफी सामान्य हैं। आमतौर पर लोग नजरअंदाज कर देते हैं।
ये बातें रविवार को स्थानीय होटल में गोरखपुर ऑप्थेलमिक एसोसिएशन के सेमिनार में मुख्य वक्ता कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की डॉ. शालिनी मोहन ने कहीं। उन्होंने कहा कि आंखों में भारीपन, सिरदर्द, पढ़ने में दिक्कत और बार-बार आंखों के चश्मे का नंबर बदले तो डॉक्टर से इलाज कराएं। ग्लूकोमा का आंख पर दुष्प्रभाव कभी कम नहीं होता। एम्स दिल्ली के डॉ. विनोद अग्रवाल और इलाहाबाद मेडिकल कॉलेज के प्रो. जेके सिंह ने डायबिटीज के कारण रेटिना की बीमारी पर व्याख्यान दिया। दोनों ने कहा कि डायबिटीज रोगियों को आंखों में रेटिना खराब होने का खतरा रहता है। ऐसे मरीजों को समय-समय पर आंखों की जांच करानी चाहिए। दिल्ली के सेंट्रल रेलवे अस्पताल के डॉ. ओपी आनंद ने मोतियाबिंद के इलाज व ऑपरेशन की जानकारी दी।
एसोसिएशन के सचिव व बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्ररोग के विभागाध्यक्ष डॉ. राम कुमार जायसवाल ने कहा कि 17 वर्ष पहले एसोसिएशन की स्थापना हुई। इसमें गोरखपुर व बस्ती मंडल के 150 से अधिक नेत्ररोग विशेषज्ञ बतौर सदस्य शामिल हैं। एसोसिएशन इलाज की नई तकनीक की जानकारी के लिए हर वर्ष सेमिनार कराता है।