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जिपं अध्यक्ष के खिलाफ आ सकता है अविश्वास प्रस्ताव

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सिद्धार्थनगर। जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर ‘अपने’ को बैठाने के लिए सत्ताधारी दल ने कवायद तेज कर दी है। शनिवार को नगर से सटे एक होटल में करीब 20 जिला पंचायत सदस्यों व उनके प्रतिनिधियों के साथ पार्टी नेताओं ने गोपनीय बैठक की। इसमें जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास लाने की रूपरेखा तैयार की गई। हालांकि अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोई तिथि अभी तय नहीं हो पाई है। बावजूद इसके माना जा रहा है कि दशहरे बाद इसकी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। 48 सदस्यों वाले मिनी सदन में अविश्वास के लिए कुल 25 सदस्यों की सहमति जरूरी है। मौजूदा परिदृश्य में 46 सदस्यों का मत ही मान्य होगा। कारण कि दो दिन पहले ही राजकुमारी देवी का निधन होने से एक पद रिक्त हो गया है, जबकि शोहरतगढ़ ब्लॉक क्षेत्र से उपचुनाव में निर्वाचित अतहर अलीम ने अब तक शपथ ग्रहण नहीं किया है। ऐसे में 24 सदस्यों की सहमति मान्य होगी। मौके की नजाकत देखते हुए सत्ताधारी दल ने जिला पंचायत अध्यक्ष को अपदस्थ करने के लिए सक्रियता बढ़ा दी है। पिछले दिनों कुछ सदस्यों व उनके प्रतिनिधियों ने सदर ब्लॉक में बैठक की थी। इसके बाद शनिवार को जिला पंचायत सदस्यों की माननीयों की मौजूदगी में बैठक हुई। इसमें जिपं सदस्यों ने एक स्वर में अध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताया। कहा कि विकास कार्यों में तवज्जो तो दूर मान-सम्मान भी नहीं मिल रहा। सभी कार्य सिर्फ डुमरियागंज क्षेत्र में हो रहे हैं। सदस्यों ने एएमए के रुख पर भी नाराजगी जताई। सूत्रों के अनुसार, बैठक में तय हुआ कि जिला पंचायत सदस्य अध्यक्ष को अपदस्थ करने को तैयार रहें। जल्द ही अविश्वास प्रस्ताव के संबंध में सभी सदस्यों को सूचित किया जाएगा और अगले दिन अविश्वास का नोटिस डीएम को सौंपा जाएगा। पार्टी सूत्रों के अनुसार, बैठक में जिला पंचायत सदस्यों के साथ ही सत्तासीन दल के विधायक, सांसद और जिले के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
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चार सदस्यों के प्रस्ताव मंजूर न होने पर जताई नाराजगी
बैठक में जिला पंचायत के माध्यम से सड़कों को गड्ढामुक्त किए जाने के लिए स्वीकृत प्रस्तावों का मामला भी छाया रहा। जिपं सदस्यों ने कहा कि डुमरियागंज विधानसभा क्षेत्र के ही अधिकांश कार्य मंजूर हुए हैं, जबकि चार सदस्यों का कोई भी प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हुआ। इस भेदभाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि अगर चार सदस्यों के प्रस्ताव मंजूर नहीं हुए तो फिर अन्य कोई सदस्य भी काम नहीं कराएगा। इस पर माननीयों ने डीएम, मंडलायुक्त और शासन के अधिकारियों से वार्ता की और शीघ्र ही इस टेंडर प्रक्रिया को निरस्त कर नए सिरे से टेंडर जारी कराने का आश्वासन दिया।

एएमए के रुख पर जताई नाराजगी
बैठक में सदस्य जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी के रूख से भी नाराज रहे। उन्होंने कहा कि एएमए अक्सर अनुपस्थित रहते हैं। चिह्नित लोगों को छोड़कर अन्य की अनदेखी होती है। सदस्यों की नाराजगी पर विधायकों ने एएमए से संपर्क साधना चाहा, लेकिन उनका मोबाइल फोन स्वीच ऑफ रहा। इसे भी गंभीरता से लिया गया।
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