गोरखपुर।
जिले में कई स्थानों पर डेंगू का लार्वा पाए जाने के बाद भी स्वास्थ्य अफसर बेखबर है। जिला अस्पताल में वार्ड और डॉक्टरों की टीम गठित कर विभागीय अफसर खामोश हो गए। सीएमओ संवेदनशील स्थानों को चिह्नित कर फागिंग और लार्वा नष्ट करने के लिए केमिकल छिड़काव की दलील तो दे रहे हैं लेकिन वह तय तिथि नहीं बता पा रहे हैं।
पिछले साल जिले में सौ से ज्यादा डेंगू के मरीज प्रकाश में आए थे। हालांकि स्वास्थ्य अफसर तब भी इन्हें बाहर के मरीज बताते रहे। यही वजह थी कि बीमारी से बचाव की तैयारी में लेटलतीफी हुई थी। इस साल भी स्वास्थ्य विभाग के अफसर अब तैयारी कर रहे हैं जब रोडवेज बस डिपो सहित कई इलाकों की जांच में डेंगू के लार्वा पाए जाने की पुष्टि हो चुकी है। सीएमओ रवींद्र कुमार का कहना है कि जिले में 941 स्थानों को संवेदनशील चिह्नित किया गया है। वहां एंटी लार्वा केमिकल डाला जाना है, जबकि 598 स्थान ऐसे हैं जहां फागिंग होनी है। अगर विभागीय कार्यप्रणाली में तेजी नहीं आई तो इतना तय है कि डेंगू को रोक पाना मुश्किल होगा।
जागरूकता के लिए भी नहीं हुआ कोई प्रयास
डेंगू के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक जागरूकता का भी कोई कार्यक्रम शुरू नहीं किया जा सका है जिससे लोग यह जान सके कि इस बीमारी से कैसे बचना है। इसके लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए, जबकि इसके लिए हर साल अलग से बजट आता है।
डेंगू लार्वा मिलने पर नोटिस
लालडिग्गी, धर्मशाला और बसंतपुर समेत कई इलाकों में डेंगू के लार्वा मिले हैं। 22 दुकानों को स्वास्थ्य विभाग ने नोटिस जारी कर आसपास सफाई करने के लिए कहा है।