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परिवार की खुशियों पर आतंक का वज्रपात

Mon, 26 Jun 2017 01:44 AM IST
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, गोरखपुर।
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साहब शुक्ला के शहीद होने के बाद घर में कोहराम मचा हुआ है। - फोटो : Amar Ujala
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सैर-सपाटा, मौज-मस्ती और हर्ष-उल्लास में शनिवार का दिन बीता था। शाम को गोरखनाथ मंदिर से लौटकर परिवार रेस्टोरेंट जाने की तैयारी में था। तभी कश्मीर से शुभा शुक्ला के मोबाइल पर एक कॉल आई और इसके साथ ही खुशियों में डूबे घर पर आतंक का वज्रपात हो गया।
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मोबाइल पर दूसरी ओर सीआरपीएफ के कमांडेंट थे। फोन साहब शुक्ला की पत्नी शुभा शुक्ला ने उठाया, लेकिन कमांडेंट ने उन्हें बेटों से बात कराने के लिए कहा। इस पर शुभा ने तीसरे बेटे विभ्राट को मोबाइल थमा दिया। हालांकि, इस बीच शुभा को अनहोनी की आशंका ने घेर लिया था। अभी दो घंटे पहले तो उनकी पति साहब से बात हुई थी। अब उनके कमांडेंट का फोन क्यों आया था?

अभी वह इसी सोच में डूबी थीं तभी विराट की आंखों से आंसू झरने लगे। चंद मिनट पहले तक खुशियों में डूबे घरौंदे में अब चीत्कार गूंज रही थी। खुशी से चमकती आंखें गम से डबडबा चुकी थीं। विभ्राट ने बताया कि बड़ी भाभी ज्योति शुक्ला की शादी की सालगिरह और घर की नई बहू रागिनी का बर्थडे एक साथ पड़ा था। इसलिए शनिवार सुबह से ही घर में जशभन का माहौल था। शाम को पापा से बात हुई थी। उन्होंने खुद फोन किया था। उन्हें जानकारी थी कि हम लोग गोरखनाथ मंदिर घूमने गए हैं। लौटने के बाद हमने उन्हें फोन नहीं किया तो उन्होंने खुद कॉल लगा ली थी। फोन पर उन्होंने डांट भी पिलाई थी। घूमकर घर लौटने के बाद फोन करके न बताने पर वह नाराज थे। उन्होंने कह रखा था कि कहीं बाहर जाने के बाद घर लौटने पर तुरंत उन्हें फोन करके बताया जाए। इस बार हमारी ओर से उन्हें सूचना देने में हम चूक गए थे। थोड़ी डांट के बाद उनका प्यार भी बरसा था।
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इसके दो घंटे बाद वह कॉल आई थी जिसके खत्म होने से पहले परिवार की खुशियां भी खत्म हो गई थीं। कमांडेंट ने मां से नहीं हमसे बात कराने को कहा था। मैंने फोन लिया तो उधर से वह रोने लगे। कहा, अपने देश के लोग ही देश को खोखला करने में जुटे हुए हैं। इसके साथ ही पापा के शहीद होने की उन्होंने जानकारी दी।

...तो पहले ही हो गया था अनहोनी का अहसास
शहीद साहब शुक्ला के छोटे बेटे विभ्राट ने बताया कि आमतौर पर पापा रिश्तेदारों को जल्दी फोन नहीं करते थे, लेकिन शनिवार को उन्होंने दोनों मौसी, मामी, नाना समेत अपने दोनों समधियों से बात की थी। आमतौर पर ऐसा नहीं होता था, लेकिन लगा कि पापा को कि पहले से ही अनहोनी का अहसास हो गया था। इससे पहले जब वह मई में गांव आए थे तब वह मुझे यह कहते हुए खेत दिखाने ले गए थे कि क्या पता, कब कौन सी गोली जान ले जाए, ऐसे में अपने खेत देख लो। इससे पहले पापा जब भी घर आए, उन्होंने कभी इस तरह की कोई बात नहीं की थी।

गांववालों ने शहीद के लिए मांगा सम्मान
गांववालों में शहीद साहब शुक्ल के प्रति काफी सम्मान था। गांववालों ने मृदुभाषी सरल स्वभाव के साहब शुक्ला के नाम पर कसिहार मोड़ से मझगांव तक की सड़क का नामकरण शहीद साहब शुक्ला मार्ग करने की मांग की। इसके साथ ही शहीद के बेटों के लिए नौकरी भी मांगी। गांव के लोगों ने बताया कि हाल ही में बड़े बेटे सौरभ ने मुंबई में प्राइवेट जॉब शुरू की थी। दूसरे नंबर के विभ्राट, तीसरे नंबर के देवाशीष और सबसे छोटे विराट घर पर ही रह रहे हैं। इसके साथ ही गांववालों ने क्षेत्र में शहीद के नाम पर एक अस्पताल खोलने की भी मांग की।

गांव में लो वोल्टेज की समस्या
शहीद के गांव मझगांव में बिजली लोगों को खूब तंग करती है। गांववालों ने बताया कि अक्सर लो-वोल्टेज की समस्या रहती है। इसके चलते बिजली का लाभ नहीं मिल पाता। घर पर लगे उपकरण चल नहीं पाते। लोगों ने उम्मीद जताई कि अब प्रशासन शायद गांव की सुध लेगा और बिजली व्यवस्था में सुधार जरूर होगा। 

दिन भर दुरुस्त होती रहीं गलियां, नालियां
शहीद के घर पर सुबह एसडीएम और सीओ के दौरे के बाद गांव की गलियां और नालियां तेजी से दुरुस्त की जाने लगीं। एक ओर कीचड़ भरी कच्ची सड़क को मिट्टी डालकर आने-जाने लायक बनाया गया तो दूसरी ओर वाले रास्ते पर जमी झाड़ियों को काटकर साफ किया गया। शहीद के घर आने वाली तीसरी गली की भी मरम्मत हुई। इस गली में बनी नालियों को आननफानन साफ करके इस पर स्लैब डाले गए।

पूरे दिन हुआ शहीद के पार्थिव शरीर का इंतजार
शहीद के घर पर वक्त गुजरने के साथ भीड़ बढ़ती जा रही थी। जो पहुंच रहा था वह शहीद के पार्थिव शरीर के दर्शन के बाद जाने की सोचकर वहीं ठहर जा रहा था। दूसरी ओर शाम को शहीद का पार्थिव शरीर गांव आने की सूचना थी। लोग इंतजार कर रहे थे, इसी बीच शाम सात बजे के करीब सूचना आई कि शहीद साहब शुक्ल का शव सोमवार सुबह गांव लाया जाएगा। इसके बाद भी शहीद के दरवाजे पर लोग जमे रहे।

एयरपोर्ट पर दी गई शहीद को सलामी
गोरखपुर एयरपोर्ट पर जब शहीद साहब शुक्ला का पार्थिव शरीर आया तो यहां उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ विमान से उतारा गया। डीएम, एसएसपी व अन्य अफसरों के साथ जनप्रतिनिधियों ने पुष्पचक्र अर्पित करके शहीद को नमन किया। सेना की एक टुकड़ी ने शहीद को सलामी दी। इसके बाद शहीद के पार्थिव शरीर को जिला अस्पताल की मोर्चरी लाया गया।

आज सुबह गांव जाएगा शहीद का पार्थिव शरीर 
शहीद के शव को जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया है। यहां से शहीद के शव को सुबह 9:30 बजे पैतृक गांव मझगांव भेजा जाएगा। इसके पहले शाम 4 बजे करीब जैसे ही जिला अस्पताल में शहीद के शव के पहुंचने की सूचना मिली, एसआईसी डॉ. डीके सोनकर ने खुद जरूरी व्यवस्थाएं मुकम्मल कराईं। बाद में जिलाधिकारी, एसएसपी, सिटी मजिस्ट्रेट, एसडीएम व जिला अस्पताल के एसआईसी की मौजूदगी में सम्मान के साथ शव को मोर्चरी हाउस के डीप फ्रीजर में रखवाया गया। 
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