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नेपाली हॉस्टल निर्माण में बेरुखी

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अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर।
गोरखपुर यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय नेपाली हॉस्टल निर्माण के लिए बजट मिलने के बाद भी काम शुरू नहीं हो सका है। मार्च में बजट जारी होने के बाद अब तक यूनिवर्सिटी प्रशासन का कार्यदायी संस्था से करार नहीं हो सका है। इससे अब तक हॉस्टल निर्माण की प्रक्रिया ठप पड़ी है।
9 करोड़ 52 लाख की कीमत से बनने वाले हॉस्टल निर्माण को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने हरी झंडी दी थी। मार्च में बजट की पहली किस्त के रूप में चार करोड़ रुपये जारी भी हुए, मगर जिम्मेदारों की बेरुखी के चलते आज तक काम शुरू नहीं हो सका। ऐसा नहीं है कि हॉस्टल निर्माण को लेकर पहली दफा पेंच फंसा हो। विकास समिति से पास हुए बिना हीरापुरी कॉलोनी में इसका निर्माण कार्य कार्यदायी संस्था की ओर से शुरू कर दिया गया। जगह की साफ सफाई देख शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने इसे शिक्षक आवास से दूर किए जाने का आग्रह किया। इसके बाद से अभी तक मामला लटका हुआ है।
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ये होंगी सुविधाएं
दो फ्लोर में नीचे और ऊपर कुल मिलाकर 100 कमरे बनाए जाएंगे।
कमरों में अटैच बाथरूम, टॉयलेट की सुविधा मिलेगी
लाइब्रेरी, डायनिंग हॉल के साथ आधुनिक मेस
पार्किंग की अलग से होगी व्यवस्था
हर फ्लोर पर लगेंगे वॉटर कूलर

नेपाली विद्यार्थियों को मिलेगी सुविधा
नेपाली हॉस्टल के निर्माण होने से वहां के रिसर्च स्कालर्स और विद्यार्थियों को सुविधा होगी। फिलहाल उन्हें किराए का कमरा लेकर यहां पढ़ाई करनी पड़ती है। इससे उनपर आर्थिक बोझ बढ़ता है। गोरखपुर यूनिवर्सिटी के यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों में करीब 100 से ज्यादा विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं।

हॉस्टल निर्माण के लिए स्थान का चयन नहीं हो सका है। शीघ्र ही विकास समिति की बैठक कर कार्यदायी संस्था को निर्माण की जिम्मेदारी दी जाएगी।
- प्रो. हर्ष सिन्हा, जनसंपर्क अधिकारी, गोरखपुर यूनिवर्सिटी
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