सीएम योगी आदित्यनाथ की समीक्षा बैठक के एक दिन बाद ही बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जानलेवा लापरवाही सामने आई है। ऑक्सीजन सप्लाई ठप होने से पिछले 36 घंटे में मेडिकल कॉलेज में भर्ती 50 लोगों की मौत हो गई। इनमें 29 मासूम हैं। गुरुवार से शुरू हुए संकट पर काबू पाने में मेडिकल कॉलेज प्रशासन नाकाम रहा जो शुक्रवार को मासूमों के लिए काल बन गया। इसकी सूचना पाते ही डीएम राजीव रौतेला और सीएमओ सहित तमाम अफसर मेडिकल कॉलेज पहुंच गए। पूरे मामले की जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी ली है। माना जा रहा है कि लापरवाह अफसरों पर जल्द ही गाज गिरेगी। बहरहाल, डीएम ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी बना दी है। यह कमेटी शनिवार को दोपहर 12 बजे तक रिपोर्ट देगी। मेडिकल कॉलेज में मौत की सूचना पाकर बांसगांव संसदीय सीट से भाजपा सांसद कमलेश पासवान भी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। भाजपा सांसद ने भी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की वजह से मौतों की पुष्टि की है।
महज 69 लाख रुपये के बकाए को लेकर मेडिकल कॉलेज को ऑक्सीजन की सप्लाई देने वाली फर्म ने हाथ खड़े कर दिए थे। इसके चलते लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट में गुरुवार को गैस खत्म हो गई तो जंबो सिलेंडरों और अम्बू बैग से मरीजों की जान बचाने की कोशिश होती रही लेकिन शुक्रवार की शाम तक 29 मासूम जान से हाथ धो बैठे। इस जानकारी के बाद प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया। कमिश्नर अनिल कुमार ने मोदी इंपीरियल के मालिक को फोन करके 205 ऑक्सीजन सिलेंडर मंगवाया, तब जाकर कुछ स्थिति कुछ सामान्य हो सकी। सीमा सुरक्षा बल (एसएसबी) सहित शहर के अन्य बड़े नर्सिंग होम से भी ऑक्सीजन सिलेंडर मंगाया गया। मेडिकल कॉलेज के सूत्रों ने बताया कि ऑक्सीजन की कमी का सबसे ज्यादा खामियाजा बच्चों को भुगताना पड़ा है। शुक्रवार को सुबह 10 बजे के बाद से इंसेफेलाइटिस पीड़ित 13 बच्चों की मौत हुई है। इससे पहले भी इंसेफेलाइटिस और अन्य बीमारियों से परेशान 16 बच्चों की मौत हुई थी। इन आंकड़ों को मिला लिया जाए तो पिछले 40 घंटे में 29 बच्चों की मौत हुई है। ऑक्सीजन की कमी की वजह से 21 और बड़े लोगों की मौत भी हुई है। शुक्रवार को दिनभर मेडिकल कॉलेज में रोना-पीटना मचा रहा। तमाम लोग हाथों में बच्चे का शव लेकर जाते देखे गए।
कुशीनगर के रामकोला फरेंद गांव के रहने धर्मेंद्र ने 10 दिन के बच्चे को मेडिकल कॉलेज में एडमिट कराया था लेकिन ऑक्सीजन की कमी की वजह से बच्चे की मौत हो गई। इससे पूरा परिवार गमजदा है। वहीं, मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्रा इस गंभीर घटना को लेकर बेपरवाह दिखे। उन्होंने घटना के तत्काल बाद अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया।
गुरुवार से शुरू हुई दिक्कत
बीआरडी में ऑक्सीजन का संकट गुरुवार से शुरू हुआ। लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट में गैस खत्म हुई तो गुरुवार को दिन भर 90 जंबो सिलेंडर से ऑक्सीजन की सप्लाई हुई। रात करीब एक बजे यह भी खत्म हो गई। इससे अस्पताल में हाहाकार मच गया। साढ़े तीन बजे 50 सिलेंडर के जरिए स्थिति संभालने की कोशिश हुई। यह भी सुबह साढ़े सात बजे सूख गए।
सुबह हुई दिक्कत तो हुआ हंगामा
100 बेड वार्ड में भर्ती इंसेफेलाइटिस के 73 मरीजों में से 54 वेंटिलेटर पर हैं। सुबह साढ़े सात बजे ऑक्सीजन खत्म होने पर यहां तीमारदारों का हंगामा शुरू हो गया। एम्बुबैग के सहारे मरीजों को ऑक्सीजन दी गई। इसमें लगे तीमारदार भी थक गए।
एसएसबी और मोदी इंपीरियल बनी मददगार
मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन संकट में एसएसबी मददगार बना। इसके साथ ही कुछ प्राइवेट अस्पतालों भी मानवता के मददगार बन आगे आए। ऑक्सीजन खत्म होने की खबर कर्मचारियों ने रात दो बजे 100 बेड वार्ड के प्रभारी डॉ. कफील खान को दी। वह तड़के तीन बजे से ही वार्ड में जा जमे। इसके बाद ऑक्सीजन सिलेंडरों का इंतजाम शुरू कर दिया। सुबह सात बजे तक जब किसी बड़े अधिकारी व गैस सप्लायर ने फोन नहीं उठाया तो डॉ. कफील ने डॉक्टर दोस्तों से मदद मांगी। अपनी गाड़ी से ऑक्सीजन करीब एक दर्जन सिलेंडरों को ढुलवाए। डॉ. कफील ने मासूमों को तड़पता देखकर एसएसबी से मदद मांगी। एक कर्मचारी के साथ वह एसएसबी के डीआईजी के पास पहुंचे। डीआईजी ने तत्काल 10 ऑक्सीजन सिलेंडर दिए और एक ट्रक भी भेजा, जिससे दूसरी जगहों से भी ऑक्सीजन सिलेंडर मंगाए जा सकें। कमिश्नर ने ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली अन्य फर्म मोदी इंपीरियल को फोन करके अनुरोध किया तो उनकी ओर से 221 सिलेंडर मेडिकल कॉलेज को भेजे गए।
बकाए की वजह लापरवाही
बीआरडी में दो वर्ष पूर्व लिक्विड ऑक्सीजन का प्लांट लगाया गया। इसके जरिए इंसेफेलाइटिस वार्ड समेत 300 मरीजों को पाइप के जरिए ऑक्सीजन सप्लाई की व्यवस्था बनी। गैस की सप्लाई का जिम्मा पुष्पा सेल्स को मिला। कंपनी के अधिकारी दिपांकर शर्मा ने प्राचार्य को पत्र भेजकर बताया कि कालेज पर 68 लाख 58 हजार 596 रुपये का बकाया हो गया है। बकाया की अधिकतम तय राशि 10 लाख रुपये है। बकाया की रकम तय सीमा से अधिक होने के कारण देहरादून के आईनॉक्स कंपनी की एलएमओ गैस प्लांट ने गैस सप्लाई देने से मना कर दिया है।
मौतों के बाद जागी संवेदना
बीआरडी में गुरुवार को शुरू हुए संकट के बाद शाम से ही बच्चों की मौत का सिलसिला शुरू हो गया। एक-एक कर बच्चों की मौत से परेशान डॉक्टरों ने पुष्पा सेल्स के अधिकारियों को फोन कर मनुहार की। उधर, कालेज प्रशासन ने 22 लाख रुपये बकाया भुगतान की कवायद शुरू की। इस पर पुष्पा सेल्स के अधिकारियों ने लिक्विड ऑक्सीजन टैंकर भेजने का फैसला किया। हालांकि, ये टैंकर भी शनिवार की शाम या रविवार तक ही बीआरडी पहुंचने की उम्मीद है।
फर्म ने पहले भी रोकी थी सप्लाई
अप्रैल 2016 में भी फर्म ने करीब 50 लाख रुपये के बकाए पर सप्लाई रोक दी थी। फर्म ने कई बार बकाया भुगतान के लिए पत्र लिखा। भुगतान में देर हुई तो गैस आपूर्ति ठप कर दी। इस पर तब जमकर हंगामा हुआ था।
खबर फैलते ही अफसरों ने डाला डेरा
ऑक्सीजन बिना तड़पते मासूमों की मौत की खबर फैलते ही शाम को मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य विभाग समेत प्रशासन के अफसरों ने मेडिकल कॉलेज में डेरा डाल दिया। कमिश्नर, डीएम, एडी हेल्थ, सीएमओ समेत कई अफसर शाम को मेडिकल कॉलेज में जमे रहे। डीएम ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। माना जा रहा है कि दो दर्जन से ज्यादा मौतों के मामले में मेडिकल कॉलेज प्राचार्य पर गाज गिर सकती है।
ये वार्ड हैं प्रभावित
-ट्रॉमा सेंटर
-100 बेड वाला इंसेफेलाइटिस वार्ड
-नियोनेटल यूनिट
- इमरजेंसी मेडिसिन वार्ड-14
- मेडिसिन आईसीयू
- एपीडेमिक मेडिसिन वार्ड-12
- बालरोग वार्ड 6
- वार्ड नंबर 2
- एनेस्थिसिया आईसीयू
- लेबर रूम
- जनरल सर्जरीए न्यूरो सर्जरी ओटी