बीते साल हुए 119 में से 93 मौतों की आडिट स्वास्थ्य विभाग की ओर से किया गया था। इसमें यह पूरी तरह से साफ हो चुका है कि ज्यादातर मौतों की वजह प्रसव के 24 घंटे के भीतर अत्यधिक रक्तस्राव होना है। इन्हें यदि सही समय पर उचित इलाज मिला होता तो बचाया जा सकता था। सुरक्षित प्रसव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 27 जनवरी से मातृत्व सुरक्षा सप्ताह की शुरूआत की। इसके तहत 19 ब्लॉक में 38215 गर्भवती महिलाओं की जांच का लक्ष्य रखा गया। एक हफ्ते चले अभियान में एएनएम और आशाओं ने 27043 गर्भवती की जांच की । जांच में सामने आया है कि कुपोषित महिलाएं गर्भवती हो गई हैं। 478 महिलाएं ऐसी मिली, जिनका वजन 40 किलोग्राम से कम था। इनका हीमोग्लोबिन भी सात ग्राम से कम मिला। इन्हीं को हाई रिस्क प्रेगनेंसी की श्रेणी में रखा गया।
हर हफ्ते जांच होगी
हाई रिस्क प्रेगनेंसी की महिलाओं की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग ने योजना तैयार कर ली है। आशा, एएनएम के माध्यम से जांच हर हफ्ते कराई जाएगी। महिलाओं को कैल्शियम व आयरन की दवाएं मुफ्त दी जाएंगी साथ ही वजन व हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने का भी इंतजाम किया जाएगा।