फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आईपीएल में ऑनलाइन सट्टेबाजी का भंडाफोड़, चार गिरफ्तार

Tue, 30 Apr 2019 01:36 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो क्राइम डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
विज्ञापन
विज्ञापन
गोरखपुर। मोबाइल एप की मदद से आईपीएल मैचों पर ऑनलाइन सट्टेबाजी करने वाले गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गोरखनाथ इलाके के एक घर पर छापा मार कर चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। मौके से दो लाख पचास हजार आठ सौ रुपये और आठ मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। सट्टेबाजों के तार मुंबई से जुड़े हैं। गिरोह के चार सदस्य फरार हैं जिनकी तलाश में पुलिस लगी है।
विज्ञापन


एसपी सिटी विनय कुमार सिंह और सीओ क्राइम प्रवीण सिंह ने पुलिस लाइंस में सोमवार को संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस कर गिरोह का भंडाफोड़ किया। एसपी सिटी ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर जटेपुर दक्षिणी के रहने वाले रवि गुप्ता के घर छापा मारा गया। वहां मौजूद लोगों ने पुलिस से हाथापाई भी की। पकड़े गए आरोपियों ने पूछताछ में मुंबई से गैंग संचालित होने की बात कबूली है। बेट लगवाने के लिए आरोपियों को रकम का सात प्रतिशत कमीशन मिलता था।

आरोपियों की पहचान धर्मशाला बाजार जटेपुर दक्षिणी निवासी रवि गुप्ता और राकेश जायसवाल, राजेंद्रनगर निवासी प्रिंस चौबे व पुर्दिलपुर निवासी किशन यादव के रूप में हुई। गिरोह के चार फरार सदस्य अजय यादव, अंकुर केसरवानी, शैलू गुप्ता और दानिश की तलाश में पुलिस टीम लगी है। गिरफ्तारी करने वाली टीम में एसओ गोरखनाथ राज प्रकाश सिंह, स्वाट प्रभारी सादिक परवेज, सर्विलांस प्रभारी धीरेंद्र राय, संजय सिंह, विपेंद्र मल्ल, शशिकांत राय आदि शामिल थे।

नकद में होता था धंधा

सट्टेबाज एप की मदद से बेट लगाते थे लेकिन रुपयों का लेनदेन नकदी में होता था। सट्टा लगाने वाले को रवि के घर आकर रुपये देने होते थे। इसके अलावा शहर के कुछ निश्चित ठिकानों पर भी रुपयों का लेनदेन होता था। इनकी तलाश पुलिस ने तेज कर दी है।

हर गेंद, विकेट पर लगता था सट्टा

सट्टे की रकम हर गेंद पर बदल जाती थी। कोई रन के हिसाब से तो कोई विकेट के आधार पर सट्टा लगाता था। सट्टेबाज इसका पूरा हिसाब रखते थे और फिर अगले दिन उसी हिसाब से रुपयों का लेनदेन किया जाता था।

इस नाम के एप का होता इस्तेमाल

क्रिकेट बीट, क्विक बीट, बीट कूलर, ईसाई फाक्स समेत 12 ऐसे एप है जिसके जरिए सट्टेबाजी का धंधा चलता था और फिर कमीशन के तौर पर सट्टेबाजों को रकम दी जाती थी।

लूट की रकम से सट्टेबाजी

पुलिस के मुताबिक सट्टेबाजी का खेल शुुरू होने के साथ ही छिनैती, लूट की घटनाएं भी बढ़ी हैं। इस बिंदु पर भी काम किया जा रहा है। आशंका है कि कुछ नए युवक सट्टेबाजी के लिए ही गलत काम करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


नोट: आपको हमारी यह स्टोरी कैसी लगी इस पर अपना फीडबैक नीचे बने कमेंट बॉक्स में जरूर दें।


 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें