गोरखपुर। नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग की गाड़ियों के लिए डीजल खरीद में बड़ा गोलमाल किया गया है। इसका खुलासा इन गाड़ियों में लगे ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) में दर्ज आंकड़ों और चालकों की ओर से खरीदे गए डीजल में ज्यादा अंतर मिलने पर हुआ। औसतन 40 दिनों के आंकड़ों का मिलान करने पर 30-35 हजार लीटर ज्यादा डीजल की खपत पाई गई है। रुपयों के लिहाज से देखा जाए तो यह लाखों में बैठती है। इसके करोड़ों में होने की आशंका जताई जा रही है। टैक्स की नोडल अधिकारी आकांक्षा राना ने इन सभी गाड़ियों के चालकों को खपत किए गए डीजल का हिसाब देने के लिए नोटिस जारी किया है।
नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग में करीब 230 गाड़ियां हैं। इनसे शहर के विभिन्न इलाकों के कूड़े के निस्तारण और नालियों की सफाई में इस्तेमाल किया जाता है। मात्र 70 गाड़ियों की ही जांच में 30-35 हजार लीटर डीजल की खपत ज्यादा निकली है। किसी ड्राइवर ने 400 तो किसी ने 600 लीटर ज्यादा तेल की खपत दिखाई है। ऐसे में यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब सभी 230 गाड़ियों में डीजल खपत का ब्योरा सामने आएगा तो आंकड़ा कहां तक जाएगा।
ऐसे कराई गई डीजल खपत की जांच
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट आकांक्षा राना ने गाड़ियों को गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर में चलवाया। जीपीएस लगी इन गाड़ियों में डीजल खपत की जांच की गई। इसके बाद उन गाड़ियों में करीब 40 दिनों के डीजल खपत का औसत निकाला गया। इसके बाद गड़बड़ी पकड़ में आई।
चोरी रोकने को लगा जीपीएस ही बंद करा दिया गया
यह भी पता चला है कि नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने गाड़ियों में लगा जीपीएस बंद करा दिया था। लंबे अरसे तक इसे बंद रखा गया और चालकों को डीजल की पर्ची जारी की जाती रही। यह हाल तब रहा जब नगर निगम प्रशासन ने डीजल की चोरी रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग की कूड़ा उठाने वाली सभी गाड़ियों में जीपीएस लगवाया था।
नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग की गाड़ियों में डीजल खपत के तरीके में बदलाव की आवश्यकता है। जीपीएस में दर्ज आंकड़ों और चालकों की ओर से लिए गए डीजल में काफी अंतर मिला है। सभी चालकों को नोटिस भेजा गया है। जवाब आने के बाद आगे कार्रवाई की जाएगी।
- आकांक्षा राना, नोडल अधिकारी टैक्स, नगर निगम