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कबीर पंथियों की धरोहर का होगा कायाकल्प

Sun, 25 Nov 2018 01:00 AM IST
अमर उजाला/गाोरख्ापुर
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कबीर दास
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गोरखपुर। मगहर क्षेत्र स्थित गोरखतलैया-कबीरधूनी के नाम से प्रसिद्ध धरोहर के कायाकल्प की राह आसान हो गई है। किसानों की जमीन के अधिग्रहण से जुड़े मसले का हल हो गया है। शासन ने मुआवजे की राशि भू अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय को भेज दी है। अगले हफ्ते तक मुआवजे की राशि किसानों के खातों में भेजे जाने की उम्मीद है। काम कराने के लिए पर्यटन विभाग के तीन करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है।
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गोरखतलैया-कबीरधूनी को विकसित करने के लिए पांच एकड़ भूमि की तलाश की जा रही थी। कबीर मठ ने पर्यटन विभाग को चार एकड़ जमीन मुहैया करा दी। पर्यटन विभाग ने एक एकड़ जमीन अधिगृहीत करने की योजना बनाई। कई चरणों में हुई वार्ता के बाद 32 किसानों से जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अब जाकर पूरी हो सकी है।
 

फोरलेन निर्माण के चलते कम हो गई जमीन

गोरखतलैया-कबीर धूनी के लिए दो एकड़ से ज्यादा जमीन पहले से ही आवंटित थी, मगर गोरखपुर-लखनऊ हाइवे के फोरलेन में परिवर्तित होने के बाद इसका कुछ हिस्सा सड़क में चला गया।

कबीरपंथियों की आस्था से जुड़ा है यह स्थल

माना जाता है कि 15वीं सदी में मगहर क्षेत्र में भयंकर सूखा व अकाल पड़ा था। यहां के जमींदारों ने काशी जाकर संत कबीर को मगहर आने और लोगों के उद्धार का तरीका बताने का आग्रह किया था। यहां पहुंचे संत कबीर ने आमी नदी के किनारे एक जगह बैठकर गुरु गोरखनाथ से इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा की थी। कबीरपंथी मानते हैं कि इस चर्चा के बाद गुरु गोरखनाथ ने अपना त्रिशूल जमीन में धंसा दिया था, जहां से पानी की धारा बहने लगी। उसके बाद संतकबीर ने आमी नदी के दूसरे किनारे की गुफा में बैठकर धुनी (साधन) रमा ली थी। कुछ दिनों बाद क्षेत्र में वर्षा हुई।
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