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4000 ट्रकों के पहिए थमे, 1.25 करोड़ का नुकसान

Sat, 21 Jul 2018 01:45 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
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truck strike
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गोरखपुर। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के आह्वान पर डीजल-पेट्रोल को जीएसटी के दायरे में लाने, टोल टैक्स खत्म करने समेत कई अन्य मांगों को लेकर शुरू हुई ट्रक ऑपरेटरों की हड़ताल का शुक्रवार को गोरखपुर में भी बड़ा असर दिखाई पड़ा। जिले के चार हजार से अधिक ट्रकों का संचलन ठप रहने से करीब सवा करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ। उधर रोजाना बाहर से जिले में आने वाले 500 से अधिक ट्रकों की संख्या भी घट गई। यही नहीं ट्रांसपोर्ट नगर में मजदूरी करने वाले सैकड़ों मजदूरों को कोई काम नहीं मिलने से उन्हें मायूस घर लौटना पड़ा।
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ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने तेनुआ टोल प्लाजा समेत कई अन्य स्थानों पर प्रदर्शन करने के साथ ही ट्रक चालकों को जल्द से जल्द मंजिल पर पहुंचने और गाड़ी खड़ी कर हड़ताल में सहयोग करने की अपील की। गोरखपुर गुड्स ट्रांसर्पोट्स एसोसिएशन और गोरखपुर ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन से जुड़े ट्रांसपोर्टर शुक्रवार को एकत्र हुए। गुड्स ट्रांसर्पोर्ट्स एसोसिएशन के कार्यालय पर बैठक कर ट्रांसपोर्टरों ने हड़ताल को सफल बनाने के लिए रणनीति बनाई। एसोसिएशन के अध्यक्ष आरके तिवारी ने कहा कि ट्रांसपोर्टर बेवजह टोल टैक्स और जीएसटी समेत अन्य दिक्कतों से जूझ रहे हैं। जिसे दूर किया जाना जरूरी है। डीजल के दाम में रोजाना उतार-चढ़ाव से काफी नुकसान हो रहा है। जीएसटी की वजह से हर राज्य में डीजल के दाम में अंतर है। ट्रांसपोर्टर का 70 फ ीसदी खर्च डीजल पर ही है।
 

टोल प्लाजा पर जाम से मुसीबत

ट्रांसपोर्टर धर्मेन्द्र सिंह ने कहा कि पूरे देश में जितना टोल टैक्स वसूला जा रहा है, उससे अधिक का डीजल टोल प्लॉजा पर जाम के चलते बर्बाद हो जाता है। हड़ताल के समर्थन में ट्रांसपोर्टरों ने किसी भी समान की बुकिंग नहीं की। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि गोरखपुर में रोजाना 1000 से अधिक गाड़ियों का संचालन होता है। बड़ी मात्रा में कच्चा माल भी आता है। फिलहाल के लिए एसोसिएशन ने तय किया है कि कच्चे माल से भरे ट्रक को रास्ते में खड़ा नहीं करेंगे मगर कोई भी नई बुकिंग नहीं करेंगे।

दो दिन बाद गहराएगा संकट

गोरखपुर। हड़ताल के पहले दिन तो रोजमर्रा की जरूरत के सामान पर असर नहीं दिखा लेकिन हड़ताल अगर दो दिन और चली तो मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ज्यादातर सब्जियों के साथ ही फल भी बाहर से ही आते हैं। इसके अलावा दाल, चावल, चीनी, तेल जैसे अन्य जरूरी सामान भी दूसरे जगहों से आते हैं। हड़ताल चली तो इन सभी सामानों की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
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