गोरखपुर। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आवेदन करने वाले हजारों अभ्यर्थियों का शुल्क नए साफ्टवेयर के फेर में फंस गया है। ये अभ्यर्थी परीक्षा नहीं दे सके हैं और शुल्क का रिफंड भी नहीं मिल रहा है। वहीं फेल हो चुके अभ्यर्थी दूसरी और तीसरी बार परीक्षा देने से वंचित हो गए हैं, क्योंकि उनके आवेदन का ब्योरा आरटीओ के पास नहीं है। रिफंड की कोशिशों में आरटीओ का चक्कर लगा रहे अभ्यर्थियों को विभागीय लोग नए सिरे से आवेदन की सलाह देकर लौटा रहे हैं। ये मामला सिर्फ गोरखपुर ही नहीं बल्कि दूसरे शहरों में भी है जहां नया साफ्टवेयर अपलोड किया जा चुका है।
दरअसल, आरटीओ में 22 फरवरी से पांच मार्च तक सारथी फोर साफ्टवेयर अपलोड किया गया। इस दौरान विभागीय चूक यह हुई कि आरटीओ का पोर्टल बंद नहीं किया गया और पुराना ब्योरा भी सुरक्षित नहीं रखा गया। लिहाजा अभ्यर्थियों को अब नये सिरे से आवेदन करने की मजबूरी है। अभ्यर्थियों ने आरटीओ अफसरों से गुहार लगाई है लेकिन विभागीय अधिकारियों ने ऑनलाइन शुल्क जमा होने का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया है। आवेदन करने वाले अभ्यर्थी हिमांशु तिवारी ने बताया कि अधिकारियों ने शुल्क रिफंड कराने की बजाय दोबारा शुल्क जमा करने की सलाह दी। अगर रिफंड नहीं मिला तो वे उपभोक्ता फोरम में वाद दाखिल करेंगे।
तीन बार दे सकते हैं परीक्षा
डीएल बनवाने के लिए एक अभ्यर्थी तीन बार परीक्षा दे सकता है। पहली बार फेल होने के बाद 50-50 रुपये जमाकर दो बार और परीक्षा में बैठ सकता है। लेकिन नए साफ्टवेयर में ऐसे अभ्यर्थियों का ब्योरा नहीं होने से उम्मीदवार परीक्षा देने से वंचित हो गए हैं।
डीएल का शुल्क
लर्निंग के लिए : 350 रुपये
परमानेंट के लिए : 1000 रुपये
नया साफ्टवेयर अपलोड होने के दौरान कुछ अभ्यर्थियों का मामला फंसा है। परीक्षा देने के लिए अब उन्हें नए सिरे से शुल्क जमा कर आवेदन करना होगा। ऐसे अभ्यर्थी रिफंड पाने के लिए एआरटीओ प्रशासन के पास लिखित आवेदन करें, उनके आवेदन को मुख्यालय भेजा जाएगा। सत्यापन के बाद ही मुख्यालय से रिफंड किया जाएगा।
: डीडी मिश्र, आरटीओ
सारथी फोर के फायदे
कार्यों में पारदर्शिता लाने की कोशिश में जुटे संभागीय परिवहन विभाग ने ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत अपने साफ्टवेयर को बदलकर सारथी फोर अपलोड किया है। बताया जा रहा है कि नए साफ्टवेयर से जहां विभाग में दलालों का नेटवर्क खत्म हो जाएगा वहीं वाहनों के ट्रांसफर, टैक्स, डीएल बनवाने में सहूलियत होगी। इसके अलावा विभागीय ब्यौरा आनॅलाइन हो जाएगा जिसे पूरे देश में कहीं भी अफसर देख सकेंगे।