मेयर की कुर्सी पर लगातार तीसरी बार भाजपा का कब्जा बरकरार रहा। भाजपा प्रत्याशी सीताराम जायसवाल अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सपा के राहुल गुप्ता को 75,972 वोट से हराकर विजयी हुए। उन्हें 1,46,187 मत मिले, जबकि राहुल को 70,215 वोट। मेयर के लिए कुल 3,06,351 वोट पड़े थे। 2012 में भाजपा से डॉ. सत्या पांडेय और 2007 में अंजू चौधरी ने मेयर के पद पर जीत हासिल की थी। 17 साल बाद मेयर की कमान पुरुष के हाथ में आई है। 2002 में मेयर किन्नर आशा देवी ने निर्दल के तौर पर जीत हासिल की थी। वहीं आठ नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद पर तीन पर भाजपा, तीन निर्दलीय, एक बसपा और एक सीट पीस पार्टी के खाते में गई है।
नगर निगम के चुनाव में सपा के राहुल गुप्ता को छोड़ कोई भी प्रत्याशी जमानत बचाने भर भी वोट नहीं जुटा पाया। 2,768 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना। बसपा प्रत्याशी हरेंद्र यादव को 34,354 और कांग्रेस के राकेश यादव को 27,113 मत मिले। गोरखपुर यूनिवर्सिटी में सुबह 8 बजे शुरू हुई मतगणना में डाक मतपत्रों से ही सीताराम ने बढ़त बना ली थी जो अंतिम 25 राउंड की गिनती तक जारी रही। 14 राउंड की गिनती में ही सीताराम ने करीब 55 हजार वोटों की बढ़त हासिल कर ली थी। इसके साथ ही जहां भाजपा समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया वहीं हार को लेकर आश्वस्त हो चुके कांग्रेस, सपा और बसपा समेत सभी प्रत्याशी मतगणना स्थल छोड़कर निकल गए।
काउंटिंग के दौरान वार्ड 33,34 के गणना टेबल पर ईवीएम में खराबी का आरोप लगाते हुए गैर भाजपा दलों के प्रत्याशियों ने हंगामा शुरू कर दिया। वे नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गए। वहां करीब 20 मिनट के लिए गणना बंद करनी पड़ी। प्रत्याशियों ने आरोप लगाया कि ईवीएम में 16 नाम दिख रहे हैं, जबकि प्रत्याशी 13 ही हैं। इसपर जिला निर्वाचन अधिकारी राजीव रौतेला ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ उनका भ्रम है। ईवीएम में 13 के अलावा बाकी बटन के सामने किसी प्रत्याशी का नाम नहीं दर्ज था, न ही उनके सामने कोई वोट प्रदर्शित हो रहे थे। आयोग ने भी जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्णय को सही बताया जिसके बाद वहां गणना शुरू हो सकी।
सदन में बहुमत से नौ सीट दूर
मेयर की सीट भले ही भाजपा के खाते में आ गई हो, लेकिन सदन में बहुमत से पार्टी नौ सीट दूर रह गई। बोर्ड बनाने के लिए पार्षद की 36 सीट जीतनी जरूरी है, मगर भाजपा 27 सीट ही पा सकी।