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बच्चों की बदलती सोच से रहें सावधान

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गोरखपुर।
बच्चों की बदलती सोच के प्रति माता-पिता सतर्क रहें। माता-पिता से संवादहीनता और घर में केयर फ्री माहौल में कल्पनाओं को साकार रूप देने में बच्चे ऐसा कदम उठा सकते हैं, जिससे अभिभावकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। खुद बच्चों की जान जोखिम में पड़ सकती है।
मंगलवार को कक्षा चार की छात्रा के एचपी स्कूल से निकलकर सिटी मॉल तक घूमने की घटना सामान्य नहीं है। यह दर्शाने के लिए काफी है कि बालमन बदली परिस्थितियों से कितने उधेड़बुन में है। बदलती जीवन शैली, पारिवारिक ताने-बाने का छिन्न-भिन्न होने का गहरा असर बच्चों के मस्तिष्क पर पड़ रहा है। बच्चों को ज्यादा समय न देने से माता-पिता से उनका भावनात्मक जुड़ाव खत्म हो रहा है। टीवी पर आने वाले सीरियल और कार्टून उनके दिमाग में किस तरफ क्रियाशील हो रहे हैं, इससे हम अनजान हैं।
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एक्सपर्ट के सुझाव
परिवार में संस्कार को बढ़ावा दें
बच्चों से जो कहें उसका खुद पालन करें
टीवी पर बच्चे क्या देख रहे हैं, इस पर नजर रखें
घर में अश्लील शब्दों का इस्तेमाल न करें
बच्चों को जेब खर्च देने से परहेज करें
बच्चों के बैग रोजाना चेक करें
शिक्षक बच्चों को डराए-धमकाएं नहीं, दोस्त बनें

कोट
ज्यादा व्यस्तता और बदले लाइफ स्टाइल के चलते आजकल माता-पिता और बच्चों में दूरी बढ़ती जा रही है। घर हो या स्कूल, सिर्फ अच्छे अंक लाने की खातिर पढ़ाई पर जोर देने तक ही सीमित हो जा रहे हैं। बच्चों से माता-पिता का संवाद कम होता जा रहा है। ऐसे में बच्चे अपने सहपाठी से बातें साझा करते हैं। हमें बच्चों को जिंदगी में कुछ बेहतर करने के लिए प्रेरित करना चाहिए, उनके सामने आदर्श व्यक्तियों की तस्वीर पेश करें। समस्याएं सुलझाने वाली प्रेरक कहानियां सुनाएं और खुद के जीवन की कठिनाइयों को साझा कर दोस्त की तरह व्यवहार करें। ऐसे में बच्चे खुलकर अपनी बात कहेंगे और माता-पिता के करीब आएंगे।
- रश्मि रंजन, काउंसलर
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