गोरखपुर।
ऑनलाइन बैनामा लागू होने के पहले ही अधिवक्ताओं ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। गोला और खजनी में अधिवक्ता, सब रजिस्ट्रार दफ्तर में एक-एक दिन तालाबंदी कर चुके हैं तो बाकी तहसीलों के अधिवक्ता भी विरोध कर रहे हैं। जिला मुख्यालय में भी अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन एआईजी स्टांप को दिया है। अधिवक्ताओं की मांग है कि बैनामा अभिलेख (डीड) पर यह दर्ज किया जाए कि वह किसकी ओर से तैयार किया जाए।
महकमे के अफसरों का कहना है कि अधिवक्ता बेवजह पेरशान हैं। ऑनलाइन बैनामे के लिए भी पूर्व की ही तरह डीड तैयार करनी होगी। ऐसे में उनका हित कहीं भी प्रभावित नहीं होगा। एआईजी स्टांप ने बताया कि अधिवक्ताओं का ज्ञापन शासन को भेज दिया गया है। माना जा रहा है कि अधिवक्ता इस बात से चिंतित है कि तेजी से पेपरलेस वर्किंग की तरफ बढ़ रहा रजिस्ट्री विभाग भविष्य में डीड की व्यवस्था भी न खत्म कर दे। एक अक्टूबर से गोरखपुर समेत सूबे के बाराबंकी, गाजियाबाद, जौनपुर, वाराणसी, मथुरा, बहराइच और बरेली में भी शासन ऑनलाइन रजिस्ट्री की तैयारी कर रहा है।
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ऑनलाइन बैनामे के फायदे
विभाग में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा
रजिस्ट्री दफ्तर के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी
कैश पेमेंट नहीं करने से घूस नहीं देना पड़ेगा
समय की काफी बचत होगी
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फर्जीवाड़े पर रोक चुनौती
ऑनलाइन बैनामे की राह में रजिस्ट्री विभाग के अफसरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती फर्जीवाड़ा रोकना होगा। असल मालिक की जगह जालसाजी से दूसरे की जमीन बेच देने या फिर एक ही जमीन का कई बार बैनामा हो जाने के मामले प्राय: यहां प्रकाश में आते रहते हैं। अभी तक रजिस्ट्री के दौरान विभाग के कर्मचारी जमीन बेचने वाले से पूछताछ करते थे मगर ऑनलाइन में यह सतर्कता खत्म हो जाएगी। निरक्षर लोगों के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। दलालों का हस्तक्षेप भी बढ़ेगा।