गोरखपुर।
गोरखपुर के स्मार्ट सिटी न बन पाने के बीच सीएम योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को बड़ा बयान दिया। एमएमएमयूटी में दो दिवसीय रिसर्च कॉन्क्लेव के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि स्मार्ट सिटी की राह में सबसे बड़ा रोड़ा ठोस कूड़ा प्रबंधन का ना होना है। इस व्यवस्था का शिकार गोरखपुर भी है। सीएम ने एमएमएमयूटी और गोरखपुर यूनिवर्सिटी के रिसर्च स्कॉलर्स और विज्ञानियों से कहा कि इस दिशा में रिसर्च करें। बेहतरीन कूड़ा प्रबंधन से शहर को स्मार्ट बनाया जा सकता है। इससे पहले उन्होंने यूनिवर्सिटी परिसर में पौधरोपड़ भी किया और वन अधिकारियों को निर्देश दिया कि रोपे गए पौधों का वे संरक्षण भी करें।
आईटीआरसी हॉल में आयोजित कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण की नसीहत दी। साथ ही कहा कि धान के पुआल जलाने से पर्यावरण एवं कृृषि पर दुष्प्रभाव पड़ता है। अब जरूरत सेकेंड जेनरेशन एथेनॉल के नए संयत्र लगाने की है। इससे पर्यावरण बचाया जा सकता है। वैकल्पिक ईंधन की पूर्ति भी की जा सकती है। सीएम ने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि एकेटीयू, एचबीटीयू, यूपीटीटीआई कानपुर और एमएमएमयूटी संयुक्त रूप से शहरों को सुंदर बनाने की प्रक्रिया के हिस्सेदार हैं। तकनीक से शहरों को संवारा जा सकता है। मुख्यमंत्री ने चीनी उद्योगों को लेकर रिसर्च की जरूरत बताई। इससे पहले कुलपति प्रो. एसएन सिंह ने सीएम का स्वागत किया। कुलपति ने बताया कि शुगर टेक्नोलॉजी और फॉर्मेसी का स्नातक स्तरीय पाठ्यक्रम सत्र 2018-2019 से शुरू होगा। कुलपति ने सीएम को शॉल, स्मृृति चिह्न और गुरु ब्रह्मलीन अवेद्यनाथ के चित्र की मधुबनी पेटिंंग भेंट की। इस मौके पर विश्वविद्यालय पीआरओ डॉ. गोविंद पांडेय, डॉ. एएन तिवारी, प्रो. डीके द्विवेदी, प्रो. वीके सिंह, प्रो. सुनील श्रीवास्तव, डॉ. अर्जुन दुबे, डॉ. बीके पांडेय, डॉ. आरके चौहान और कुलपति की पत्नी वंदना सिंह मौजूद रहीं।