जीएसटी के विरोध में कपड़ा व्यवसाइयों का विरोध लगातार दूसरे दिन बुधवार को भी जारी रहा। सुबह थोक वस्त्र व्यवसायी वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष राजेश नेभानी के नेतृत्व में व्यवसाइयों के प्रतिनिधिमंडल ने कमिश्नर अनिल कुमार से मिलकर उन्हें ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने कमिश्नर को जीएसटी से होने वाली दुश्वारियों के बारे में बताते हुए क पड़ा उद्योग को जीएसटी से बाहर कराने की मांग की। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने एडिशनल कमिश्नर और सिटी मजिस्ट्रेट को भी ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल में अध्यक्ष के अलावा महामंत्री सुरेश सुद्रानिया, उपाध्यक्ष रवि अग्रवाल, मनीष सर्राफ, शिव कुमार अग्रवाल, बलराम अग्रवाल और रोहित अग्रवाल आदि शामिल रहे। ज्ञापन देने के बाद कपड़ा व्यवसाई माया सिनेप्लेक्स के सामने जुटे और फिर हिन्दी बाजार, उर्दू बाजार होते हुए गीता प्रेस रेड तक जुलूस निकाला। प्रदर्शन करने वालों में मुख्य रूप से दिनेश, संजय अग्रवाल, बलराम अग्रवाल, सुभाष अग्रवाल, अरविन्द कनोडिया, शंभू शाह, उपेंद्र अग्रवाल, नवीन अग्रवाल, मोहम्मद शहीद, श्याम चांदगोठिया, नितिन नेभानी, अमित मस्करा समेत कई व्यवसाई शामिल थे।
आज इंदिरा तिराहे पर प्रदर्शन करेंगे व्यवसाई
विरोध के क्रम में व्यवसाई 29 जून को 10.30 बजे से चेतना तिराहे पर एकत्रित होकर प्रदर्शन करेंगे और फिर गोलघर, कचहरी चौराहा, टाउन हाल, घोष कंपनी, रेती होते हुए माया चौराहे तक जुलूस निकालेंगे।
कपड़ा व्यवसाइयों के सवाल
कपड़े का स्टाक कैसे मैनेज होगा
कर किस प्रकार से और कितने स्टाक पर देना होगा
जीएसटी विभाग में कितने प्रकार का रजिस्ट्रेशन कराना होगा
कटा हुआ माल वापस कै से होगा
बिना रजिस्ट्रेशन के माल आएगा या नहीं, क्योंकि इतनी जल्दी रजिस्ट्रेशन होना मुमकिन नहीं
बकाया रकम की वूसली कैसे होगी
जीएसटी से खड़ी हुई दिक्कतों से तमाम छोटे कपड़ा व्यवसाई पेमेंट की जगह माल वापसी करेंगे
कपड़े पर जीएसटी जनहित में नहीं : अंसारी
बुनकर नेता तारिक हुसैन अंसारी ने कहा कि केंद्र सरकार कपड़े पर जीएसटी लगाकर कपड़ा व्यवसायी व बुनकरों का उत्पीड़न कर रही है। कपड़ा तैयार करने के लिए जब धागा लिया जाता है तो तब उस पर टैक्स लगता है। धागे को रंगने के लिए जब रंग लिया जाता है तो भी टैक्स लगता है। उन्होंने कहा कि कपड़ा तैयार होने के बाद कपड़े पर टैक्स उचित नहीं है। इससे महंगाई बढ़ेगी, जिसका बोझ आम नागरिकों को उठाना पड़ेगा। तारिक ने कहा कि कपड़े पर जीएसटी लागू होने से बुनकर एवं छोटे कपड़ा व्यापारियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा और उनका अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।