आला हजरत इमाम रजा खां अलैहिर्रहमां का 99वां उर्स-ए-पाक शहर में कई जगहों पर अकीदत के साथ मनाया गया। कुलशरीफ की रस्म के साथ आला हजरत के उर्स का समापन हुआ।
मदरसा दारूल उलूम अहले सुन्नत मजहरूल उलूम घोसीपुरवां में इस मौके पर आयोजित जलसे में मेहमान-ए-खुसूसी अलजामियतुल अशरफिया मुबारकपुर के मौलाना मसूद अहमद बरकाती ने कहा कि आला हजरत ने भारतीय उपमहाद्वीप के मुसलमानों के दिलों में अल्लाह और पैगंबर मुहम्मद साहब के प्रति प्रेम भर कर उनकी सुन्नतों को जिंदा किया। आपकी हजार किताबों में कुरआन शरीफ का उर्दू तर्जुमा ‘कंजुल ईमान’ पूरी दुनिया में मकबूल है। आपकी किताब ‘फतावा रजविया’ इस्लामी कानून का इंसाइक्लोपीडिया हैं। मदीना मस्जिद के इमाम मौलाना अब्दुल्लाह बरकाती ने कहा कि आला हजरत के पीर सैय्यद आले रसूल अलैहिर्रहमां फरमाते हैं कि अगर कयामत के रोज खुदा उनसे पूछेगा कि दुनिया में तू मेरे लिए क्या लेकर आया है, तो खुदा की बारगाह में आला हजरत को पेश कर दूंगा। कारी मोहम्मद तनवीर अहमद कादरी ने भी जलसे में तकरीर पेश की।
नात शरीफ नूर अहमद नूर व साजिद रजा ने पेश की। सरपरस्ती कारी रईसुल कादरी और सदारत मौलाना अब्दुर्रब की रही। संचालन मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही ने किया। आखिर में कुलशरीफ की रस्म अदा कर देश-दुनिया में अमन व शांति की दुआ मांगी गई। सलातो सलाम पढ़ा गया। इस मौके पर मौलाना जाहिद मिस्बाही, हाफिज शाकिर, हाफिज अय्यूब, कारी नियाज अहमद आदि मौजूद रहे।
रसूलल्लाह पर फिदा थे आला हजरत : मौलाना असलम
तुर्कमानपुर स्थित नूरी मस्जिद में बुधवार को फज्र की नमाज के बाद कुरआन ख्वानी हुई और जोहर की नमाज के बाद कुलशरीफ की रस्म अदा की गई। इसके बाद लंगर तकसीम हुआ। मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद असलम रजवी ने तकरीर पेश की। कहा कि आला हजरत इमाम अहमद रजा खां ने पूरी जिंदगी अल्लाह व रसूल फरमा बरदारी में गुजारी। वह रसूलल्लाह पर जान व दिल से फिदा थे। मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि दुनिया के कई देशों में आला हजरत की किताबें पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं। नात शरीफ कारी मो. मोहसिन ने पेश की। अलाउद्दीन निजामी, शाबान अहमद, शरीफ अहमद, साबिर अली, सैफ, कैफ, वलीउल्लाह, वसीउल्लाह, मो. कैश आदि मौजूद रहे।
दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद में भी मना उर्स
नार्मल स्थित हजरत मुबारक खां शहीद दरगाह पर मौजूद मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत फैजाने मुबारक खां शहीद में उर्स-ए-आला हजरत मनाया गया। दरगाह पर कुरआन ख्वानी, नात ख्वानी व तकरीर का आयोजन हुआ। कुलशरीफ की रस्म अकीदत के साथ अदा हुई। इस मौके पर मुफ्ती अख्तर हुसैन ने कहा कि आला हजरत की जिंदगी का हर गोसा कुरआन और सुन्नत पर अमल करने व सुन्नियत को जिंदा करने में गुजरा। कारी महबूब रजा ने कहा कि आला हजरत यही पैगाम उम्र भर देते रहे कि नबी-ए-पाक की जात बहुत अजमत व बुलंदी वाली है। इस मौके पर मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही, दरगाह के मुतवल्ली इकरार अहमद, कारी शराफत हुसैन कादरी, अब्दुल अजीज आदि मौजूद रहे।