गोरखपुर।
इसे संयोग कहें या जेल में अपने भाई से मिलने गए आदिल की हिरासत में पूछताछ का असर कि सोमवार को डॉ कफील से मिलने कोई भी नहीं पहुंचा। जेल सूत्रों के मुताबिक डॉ. कफील ने नेहरू बैरक में अखबार और मैगजीन पढ़कर समय गुजारा। दूसरी तरफ पूर्व प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र और उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला से सोमवार को भी दो लोगों ने मुलाकात की।
रविवार की दोपहर जेल में डॉ. कफील से मुलाकात कर बाहर निकल रहे भाई आदिल को क्राइम ब्रांच की सीआईयू टीम ने पकड़ लिया था। चार घंटे पूछताछ के बाद आदिल को छोड़ा गया। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद डॉ. कफील से मिलने वाले खौफजदा हैं। इसका असर सोमवार को देखने को मिला। डॉ. कफ ील से मिलने कोई नहीं पहुंचा। जेल के सूत्रों ने बताया कि सोमवार को सुबह 10 बजे से ही डॉ. कफील खान, पूर्व प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र के साथ तैयार होकर मुलाकात का इंतजार कर रहे थे। बाद में डॉ. कफील को पता चला कि उनसे मुलाकात के लिए किसी ने पर्ची नहीं लगाई है। इससे कफील मायूस हो गए। वहीं डॉ. राजीव और डॉ. पूर्णिमा से दो लोगों से मुलाकात की। नेहरू बैरक में बंद डॉ. राजीव मिश्र और डॉ. कफील धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। दोनों जेल की दिनचर्या में ढल गए हैं। बैरक में मौजूद आदर्श बंदी आध्यात्मिक जानकारी के अलावा जेल की गतिविधियों की जानकारी दे रहे हैं।
कोट
सोमवार को डॉ. कफील से किसी की मुलाकात नहीं लगी थी। वह अपनी बैरक में थे। डॉक्टर दंपती से मिलने के लिए उनके ही घर के दो लोग आए थे। नियमानुसार मुलाकात कराई जा रही है।
- डॉ. रामधनी, वरिष्ठ जेल अधीक्षक
बरेली के डॉक्टर ने दे रखी है मुलाकात की अर्जी
डॉ. राजीव मिश्र से जेल में मिलने के लिए मुलाकात पर्ची छोड़कर कुछ लोग सीधे जेल अधीक्षक को व्यक्तिगत पत्र लिखकर मिलने का अनुरोध कर रहे हैं। इनमें बरेली के एक डॉक्टर भी शामिल हैं, जिन्होंने शुक्रवार को डॉ. राजीव से मिलने का प्रार्थना पत्र दिया। गोरखपुर से जुड़े कुछ लोगों ने भी व्यक्तिगत मुलाकात की अर्जी दी है। इसका रिकार्ड मुलाकात रजिस्टर में दर्ज नहीं है। इस हाई प्रोफाइल मामले में मुलाकात पर पर्दा डालने की कोशिश शुरू हो गई हैं। एक बंदी से सप्ताह में तीन दिन ही मुलाकात होनी है। एक दिन में तीन लोग मिल सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि एक ही पर्ची पर डॉक्टर दंपती से मुलाकात करा दी जा रही है। हालांकि वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. रामधनी ने नियमानुसार मुलाकात की बात कही है।
जेल में नहीं जाने दिया ‘खूनी खंजर’
रविवार को जेल में ‘खूनी खंजर’ को लेकर हड़कंप मच गया। पड़ताल के बाद संदिग्ध सामान को जेल की बैरक में न भेजने का निर्णय लिया गया। ‘खूनी खंजर’ अब जेल में चर्चा का विषय बना हुआ है। हुआ यूं कि रविवार की दोपहर जेल में बंद डॉ. कफील खान से मिलने उनके बड़े भाई आदिल खान पहुंचे थे। उनके पास मौजूद झोले में कपड़े, फल, रोजमर्रा के सामान और मैगजीन थी। मुख्य गेट पर पुलिस, पीएसी के जवानों ने बैग की बकायदे तलाशी ली। जेल के मुख्य गेट पर बंदी रक्षक ने झोला चेक किया, फिर अंदर सिपाहियों ने चेक किया। चार जगहों पर चेकिंग के बाद डॉ. कफील और आदिल आपस में गुफ्तगू कर रहे थे। तभी डॉ. कफील के हाथ में मौजूद एक मैगजीन पर जेल अधिकारी की नजर पड़ गई। अंग्रेजी की इस प्रतिष्ठित पत्रिका के कवर पेज पर ‘खून से सना एक खंजर’ था। कई बार उसे उलट-पलटकर देखा गया, लेकिन मैगजीन के अंदर कोई संदिग्ध सामान नहीं मिला। पड़ताल के बाद जेल अधिकारी ने पत्रिका अपने पास रख ली और कहा कि कवर पर छपी खूनी खंजर की फोटो हिंसक प्रवृत्ति की है, जो किसी की मनोदशा को बिगाड़ सकती है। इसके बाद बीआरडी कांड और सुरक्षा को लेकर जेल अधिकारी की सख्ती चर्चा में आ गई।