गोरखपुर।
एमपीपीजी कॉलेज जंगल धूसड़ में बीएड प्रायोगिक परीक्षा की शुचिता भंग होने की रिपोर्ट पर गोरखपुर यूनिवर्सिटी की परीक्षा समिति ने परीक्षा निरस्त कर दी है। हालांकि, जांच कमेटी ने परीक्षकों को क्लीन चिट दे दी है।
एमपी पीजी कॉलेजए जंगल धूसड़ में 22 जुलाई को बीएड द्वितीय वर्ष की प्रायोगिक परीक्षा थी। इसके अगले ही दिन प्राचार्य डॉ. प्रदीप राव ने यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक को पत्र देकर परीक्षा निरस्त कर दोबारा परीक्षा कराने और शुचिता भंग करने के दोषी परीक्षकों पर कार्रवाई की मांग की थी। आरोप था कि तीनों परीक्षकों ने मोबाइल पर आई एक कॉल के आधार पर एक परीक्षार्थी को 180 अंक दिए। बीएड विभागाध्यक्ष ने प्रतिरोध किया तो कुछ अंक घटा दिए गए। इसके अलावा परीक्षक ने विभागाध्यक्ष से कहा कि टीए-डीए कॉलेज को देना होता है। वह भी तब जब यूनिवर्सिटी ने काफी पहले नियम बना दिया था कि कोई परीक्षक कॉलेज से इसकी मांग नहीं करेगा। यह रकम यूनिवर्सिटी सीधे परीक्षकों को उपलब्ध कराती है। परीक्षक की टीए-डीए के नाम पर अतिरक्त वसूली की मंशा भी परीक्षा की पवित्रता भंग करती है। मामले में कुलपति ने बीएड संकाय की डीन प्रो. शैलजा सिंह के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी। जांच कमेटी ने दो दिन पहले अपनी रिपोर्ट कुलपति को सौंपी। इसमें शुचिता भंग होने की बात तो मान ली है मगर परीक्षकों पर लगे आरोप सिद्ध नहीं होने का उल्लेख किया गया। परीक्षा समिति ने जांच रिपोर्ट के आधार पर दोबारा परीक्षा कराने की संस्तुति कर दी है। एमपी पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रदीप राव ने बताया कि वह जल्द ही परीक्षा की नई तिथि तय कर यूनिवर्सिटी को प्रस्ताव भेज देंगे।
कोट-
जांच कमेटी की रिपोर्ट पर परीक्षा समिति ने एमपी पीजी कॉलेज की परीक्षा दोबारा कराने का निर्णय लिया है। परीक्षकों पर लगाए गए आरोप पुष्ट नहीं हुए, इसलिए उन्हें क्लीन चिट दे दी गई है।
प्रो. वीके सिंह, कुलपति