अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। महेवा फल मंडी और सब्जी मंडी में बारिश के बाद से स्थिति खराब है। गंदगी के कारण दूसरे दिन भी व्यापारी अपनी दुकानें नहीं खोल सके। सफाई के नाम पर सिर्फ कचरे का ढेर उठाया गया था। गंदा पानी, मच्छर का लार्वा, बदबू और कीचड़ बरकरार है। सब्जी मंडी में कोई कामकाज न होने के कारण मजदूरों का भी पूरा दिन खराब गया। गंदगी और अव्यवस्था से आक्रोशित व्यापारियों ने प्रदर्शन भी किया। गंदगी से हुए इंफेक्शन के कारण ही मंडी में काम करने वाला बाल किशन पंद्रह दिन पहले बीमार हुआ और अब वह कोमा में है। जब ‘अमर उजाला’ की टीम हालात जानने के लिए मौके पर पहुंची तो प्रशासन के खिलाफ व्यापारियों और मजदूरों में काफी गुस्सा था।
मजदूर बदबू और गंदे पानी में काम करने की स्थिति में नहीं थे। गुस्साए मजदूरों ने अपने हाथों में डंडा लेकर गंदा पानी हिलाकर दिखाया और बताया कि इस बदबू के पास से गुजरना मुश्किल है। ऐसे में काम कैसे किया जा सकता है। वहां गंदा पानी सड़ चुका है, जो कि भयंकर बदबू छोड़ रहा है। व्यापारियों और मजदूरों के लिए काम करने की स्थिति नहीं है।
सब्जी मंडी समिति के अध्यक्ष विनोद दुबे ने हालात से अवगत कराते हुए बताया कि सफाई के लिए समिति ने नगर निगम को ठेका दिया है, लेकिन ठेकेदार पंद्रह कर्मचारियों की बजाय पांच-छह से ही काम लेता है और सफाई सप्ताह में एकाध बार ही होती है। गंदगी भरे हालात में काम करके फेंकू राम का बेटा बाल किशन बीमार हो गया और कोमा में है।
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गंदगी बन रही बीमारियों का कारण
गंदगी बहुत ज्यादा है। साफ-सफाई बराबर नहीं होती है। कभी किसी को सफाई करते नहीं देखा गया है। गंदा पानी और कचरा सड़ गया है, जिस कारण लोग बीमार हो रहे हैं।
- राम भवन, व्यापारी।
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घुटने तक लगता है गंदा पानी
बारिश के दिनों में हालत इतनी खराब होती है कि घुटनों तक पानी लग जाता है। मौके पर भी गंदा पानी जमा था। दुकानदार और मजदूर दोनों परेशान हैं। सब्जी बेचने के लिए लगाई फट्टी पानी में डूबी रहती है।
- विजय कुमार, व्यापारी।
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चैंबर से होकर गुजरना खतरनाक
मंडी में गंदे पानी की निकासी के लिए दस के करीब लोहे के चैंबर हैं, लेकिन ये हमेशा गंदगी और गंदे पानी से भरे रहते हैं। कई लोग यहां से गुजरते वक्त चैंबर में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं।
- राम ललित, व्यापारी।
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ठेकेदार की गड़बड़ी के कारण नहीं होती सफाई
समिति की ओर से निगम को पैसे दिए जाते हैं। ठेकेदार की ओर से सही से साफ-सफाई नहीं कराई जाती है। अगर ठेकेदार ईमानदारी के साथ काम करे तो बारिश में होने वाली समस्या बार-बार नहीं बनेगी।
- बाले, दुकानदार।