प्राइवेट डॉक्टरों की क्लीनिक पर करीब तीन हजार टीबी के मरीज उपचार करा रहे हैं। यह सच्चाई जिला क्षय रोग अधिकारी के प्रयासों से सामने आई है। प्राइवेट अस्पतालों से सूचनाओं को लेकर कई बार किए गए पत्राचारों के बाद मिली जानकारी से अब सरकारी महकमा इन मरीजों की भी निगरानी कर रहा है।
जिले में सरकारी अस्पताल के अलावा प्राइवेट अस्पतालों में भी टीबी मरीज उपचार कराते हैं। इन मरीजों में कई ऐसे भी होते हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण बीच में ही दवा बंद कर देते हैं और उनका रोग गंभीर हो जाता है। ऐसे में जब वह सरकारी अस्पताल में आते हैं तो उनकी स्थिति को संभालना मुश्किल हो जाता है।
इसे देखते हुए जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. पीके मिश्रा ने प्राइवेट डॉक्टरों से संपर्क कर सूचनाएं भेजने की सिफारिश की थी, ताकि इन मरीजों की भी निगरानी की जा सके। कई पत्रों के अब अधिकतर प्राइवेट डॉक्टर इसकी जानकारी देने लगे हैं। इस जानकारी में प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने वाले करीब तीन हजार मरीज सामने आए हैं। इनका पूरा डिटेल टीबी अस्पताल में है और नियमित रूप से इनकी निगरानी की जाती है।
‘प्राइवेट डॉक्टरों से सूचना मिलने लगी है। करीब तीन हजार रोगियों की सूचना आ चुकी है। जिसका ब्योरा दर्ज कर मरीजों की नियमित निगरानी की जा रहा है।’
- डॉ. पीके मिश्रा, जिला क्षय रोग अधिकारी