हरिहर प्रसाद दूबे मार्ग पर कूड़े से पटा नाला।
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नालों की सफाई के नाम पर 30 लाख रुपये से ज्यादा खर्च हो चुके हैं। बावजूद इसके शहर के ज्यादातर नाले अभी भी सिल्ट और पॉलीथिन से भरे हुए हैं। शहर के नाले खुले होने के कारण अपशिष्ट पदार्थ में इसमें भर जा रहे हैं। जो पानी के बहाव को अवरुद्ध कर रहे हैं। नालों के जाम होने से बारिश के समय में जल निकासी प्रभावित होगी। बारिश में शहरवासियों को जलभराव की समस्याओं से रूबरू होना पड़ेगा।
शहर की बनावट ऐसी है कि यहां बारिश के पानी को नदियों तक पहुुंचाने के लिए पंपिंग सेट लगाने पड़ते हैं। कुछ इलाकों में स्थायी रूप से पंपिंग स्टेशन भी बने हुए हैं। फिर भी नालों की जो स्थिति है वो जलभराव की आशंका को पुष्ट कर रहा है। ऐसे में शहर में फिर से जलभराव की आशंका बन आई है। इसकी मुख्य वजह यह है कि लोगों ने नालों को ही कूड़ेदान बना रखा है। तकरीबन एक महीने पहले शहर के जिन नालों की सफाई हुई थी, कूड़ा डालने की वजह से वे नाले फिर से चोक हो गए हैं।
मुख्य खाद्य एवं सफाई निरीक्षक पीएन गुप्ता के अनुसार अभियान चलाकर नालों की सफाई की गई थी। इस काम में सफाई कर्मचारियों के अलावा बड़ी और छोटी पोकलेन मशीनें लगाई गई थीं।
नालों की सफाई का काम तकरीबन पूरा हो चुका है, लेकिन इनमें से काफी नालियां और नाले फिर से चोक हो गई हैं। इनकी सफाई के लिए फिर से शेड्यूल तैयार किया जा रहा है।
डॉ. सतीश कुमार सिंह, मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम