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कैंसर का आधुनिकतम इलाज अब शहर में

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पांच चैनल एमएचडीआर ब्रेकीथेरिपी मशीन लोकार्पण आंकोलॉजी सर्जन डॉ. सोमा सुंदरम सुब्रमणियम ने किया। - फोटो : amar ujala
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गोरखपुर। कैंसर के इलाज के लिए शहर में आधुनिकतम ब्रेकीथेरेपी मशीन हनुमान प्रसाद पोद्दार कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में लगाई गई है। 275000 डॉलर (करीब 1 करोड़ 95 लाख 25 हजार रुपये) कीमत की मशीन लग जाने से रोगी को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। अभी यह सुविधा प्रदेश के चुनिंदा शहरों में ही उपलब्ध है। रविवार को ब्रेकीथेरेपी मशीन का लोकार्पण आंकोलॉजी सर्जन डॉ. सोमा सुंदरम सुब्रमणियम ने किया। डॉ. सुब्रमणियम यूरेशियन फेडरेशन ऑफ आंकोलॉजी मास्को के संस्थापक भी हैं।
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उन्होंने कहा कि कैंसर दुनिया में तेजी से फैल रहा है। अगर जांच की जाए तो हर छह व्यक्तियों में दो लोग किसी न किसी रूप के कैंसर से प्रभावित मिल सकते हैं। इसके इलाज के लिए देश में तो नहीं लेकिन विदेशों में अनेक उन्नत मशीनें हैं। इनसे हर तरह के कैंसर की पहचान और इलाज संभव है। डॉ. सुब्रमणियम ने कहा कि वह खुद कैंसर से पीड़ित थे। अपने ठीक होने के बाद कैंसर इलाज को ही अपना मिशन बना लिया। इस परिप्रेक्ष्य में लगभग पूरे विश्व का भ्रमण करते हुए गोरखपुर के इस अस्पताल के बारे में सुना। संस्था के प्रबंधन, चिकित्सकीय टीम और रोटरी के सदस्यों के समर्पण और सरकार के सहयोग से एक रोडमैप पेश किया गया है।

इसके अंतर्गत कुछ जरूरी अर्हताएं पूरी करने पर इसे न केवल डब्ल्यूएचओ के नेटवर्क में ला दिया जाएगा बल्कि 2025 तक इस अस्पताल को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। आस्ट्रेलिया से आईं मनोचिकित्सक डॉ. शैलजा चतुर्वेदी, नाइन नैपकीन की ओर से सीएसआर के तहत की गई मदद, रोटरी के सदस्यों के सहयोग एवं अंतरराष्ट्रीय अनुदान से यह मशीन स्थापित की गई है। इस मौके पर संस्था के नितेन अग्रवाल, उमेश सिंहानिया, रसेंदु फोगला, विजय प्रकाश अग्रवाल, राजकुमार बथवाल, नीलमणि सिंहानिया, सुधीर अग्रवाल, सुनील चतुर्वेदी, राजकुमार अग्रवाल, अशोक मोदी, संजय रामरायका, मनोज टिबड़ीवाल, पीयूष, गंगा सर्राफ, डॉ. माली, डॉ. शशांक, डॉ. पूनम आदि मौजूद रहे।

स्वस्थ कोशिकाओं को नहीं होगा नुकसान

ब्रेकीथेरेपी मशीन के जरिए एक तार से सिर्फ ट्यूमर वाली जगह पर रेडिएशन का इस्तेमाल करके कैंसर पीड़ित का इलाज किया जा सकेगा। इसका लाभ यह होगा कि स्वस्थ कोशिकाओं पर रेडिएशन का दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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