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कागजों में गांव ओडीएफ, जमीनी हकीकत कुछ और

Thu, 07 Dec 2017 11:43 PM IST
deoria
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देवरिया। ‘बहू-बेटियां दूर न जाएं, शौचालय घर में ही बनवाएं...’ यह नारा जागरूकता रैलियों की तख्तियाें और कागजों तक ही सीमित रह गया है। जिले के 143 ओडीएफ घोषित गांवों में खुले में शौच का जारी रहना कुछ इसी ओर संकेत कर रहा है।शासन वर्ष 2018 तक देश को खुले से शौच मुक्त करना चाहता है। वर्ष 2017 में पंचायती राज विभाग को 50 हजार 919 शौचालय निर्माण का लक्ष्य मिला था। इसके सापेक्ष विभाग 42 हजार से अधिक शौचालयों के निर्माण का दावा किया जा रहा है। 143 ग्राम पंचायतों के ओडीएफ घोषित होने के बाद तीन सौ से अधिक पंचायतों को ओडीएफ बनाने के लिए धन रिलीज किया जा चुका है। विभाग की मानें तो इस वर्ष शौचालय निर्माण का आंकड़ा निर्धारित लक्ष्य को पार कर जाएगा। आंकड़ों के अनुसार, 42 हजार परिवारों के खुले से शौच से मुक्त होने की है। जबकि धरातल पर इसकी हकीकत अलग है। कमीशन के चक्कर में शौचालय निर्माण की गुणवत्ता में कटौती कर दी गई है। लिहाजा वह जल्द ही भर गए। इधर, संख्या गिनाने में लगे विभागीय कर्मियों ने भी गुणवत्ता की परवाह नहीं की। डीपीआरओ सत्य प्रकाश सिंह ने माना कि ओडीएफ घोषित गांवों में जागरूकता के अभाव में शौचालय होने के बावजूद कुछ लोग खुले में शौच को जा रहे हैं। गांवों में टीम भेजकर ऐसे लोगों को शौचालय से होने वाले लाभ की जानकारी दी जा रही है। नुक्कड़ नाटक के अलावा अन्य कई माध्यमों से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन में रुचि न लेने वाले प्रधानों से संपर्क किया जाएगा ताकि मिशन की गति जारी रहे।
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