पीके फेम गीतकार अमिताभ वर्मा कहानी को किसी फिल्म का कंकाल मानते हैं। उनका कहना है कि बॉलीवुड में अरसे बाद नई कहानियों का दौर लौट रहा है। पांच-सात साल पहले न्यूटन जैसी फिल्म के निर्माण की कोई सोच नहीं सकता था, लेकिन आज न सिर्फ ऐसी फिल्में बन रही हैं, बल्कि खूब देखी भी जा रही हैं। अमिताभ कुटुंब संस्था के कार्यक्रम के सिलसिले में पत्नी श्रुति अनंदिता वर्मा के साथ शनिवार को गोरखपुर में थे। इस दौरान उन्होंने फिल्म, टेलीविजन और समाज पर खुलकर बातें कीं।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ‘चिड़िया’ की परवाज
अमिताभ ने बताया कि बाल फिल्म ‘चिड़िया’ की स्क्रिप्ट उन्होंने ही लिखी है। यह फिल्म जल्द ही रिलीज होगी। अब तक विभिन्न अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में इसे 10 अवार्ड मिल चुके हैं। यह फिल्म स्लम के दो बच्चों की कहानी है, जो दूसरों बच्चों को बैडमिंटन खेलते देख उस खेल की तरफ आकर्षित हो जाते हैं।
पर्दे पर छाने को तैयार कई गीत
अमिताभ ने फिल्म ‘सात कदम’ और ‘कुछ भीगे अल्फाज’ के लिए गीत लिखे हैं। उन्होंने बताया कि ये दोनों फिल्में 2018 में प्रदर्शित होंगी। एरोस के बैनर तले बनी ‘सात कदम’ पिता-पुत्र की कहानी है। इस फिल्म के लिए उन्होंने चार गाने लिखे हैं। वहीं ‘कुछ भीगे अल्फाज’ का एक गाना लिखा है।
टेलीविजन से हुआ मोहभंग
लंबे समय तक टेलीविजन से जुड़े रहे अमिताभ का छोटे पर्दे से मोहभंग हो चुका है। उनका कहना है कि टीवी चैनल मनोरंजन के नाम पर नकारात्मकता परोस रहे हैं। हर चैनल पर सास-बहू के झगड़े, मौसी-बुआ का षडयंत्र आदि ही नजर आता है।
जेल से स्कूल तक गूंज रही प्रार्थना
मी टू फिल्म एंड इवेंट कंपनी के जरिए अमिताभ पत्नी श्रुति अनंदिता के साथ सामाजिक कार्य भी कर रहे हैं। पिछले दिनों वह बिहार सरकार के कहने पर वहां के स्कूलों के लिए प्रार्थना लिख चुके हैं। बिहार के स्कूलों में यही प्रार्थना गाई जा रही है। इसी साल तिहाड़ जेल के पांच कैदियों के साथ उन्होंने एक अन्य प्रार्थना रिकॉर्ड की है। यह प्रार्थना तिहाड़ के बंदी गा रहे हैं। उनके प्रयास के बाद जेल में म्यूजिक रूम भी तैयार हुए हैं। अब वह ऐसा काम अन्य जेलों में करना चाह रहे हैं। इसके अलावा वह अंतरराष्ट्रीय मजदूर संगठन के लिए एंथम लिख चुके हैं। ‘अपना हक’ नाम के इस गीत को कैलाश खेर ने आवाज दी है।