संतकबीरनगर। खलीलाबाद ब्लॉक प्रमुख मनोज राय के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक से पूर्व ही एक नाटकीय घटनाक्रम में दोनों पक्षों में गुरुवार को समझौता हो गया। इसमें कई मुद्दों पर आम सहमति बनी और तय हुआ कि ब्लॉक प्रमुख मंगलवार को इस्तीफा दे देंगे। इस समझौते में सदर विधायक ने अहम भूमिका निभाई। बनियाबारी स्थिति भाजपा नेता बृजभूषण पांडेय के आवास पर बृहस्पतिवार करीब सवा बारह बजे हुई प्रेस वार्ता में विधायक दिग्विजय नारायण उर्फ जय चौबे ने कहा कि करीब डेढ़ साल पहले हुए चुनाव में मनोज राय व मनमोहन पांडेय प्रत्याशी थे। कुछ मतों से मनोज जीत गए। इसी बीच विकास के मुद्दे पर कुछ क्षेत्र पंचायत सदस्य आक्रोशित थे। इस कारण मनमोहन पांडेय के नेतृत्व में ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की नोटिस दिया गया। गुरुवार को बैठक और मत विभाजन की तिथि तय हुई थी। दोनों पक्षों द्वारा मध्यस्थता के अनुरोध पर, मेरे द्वारा दोनों पक्षों को एक मंच पर लाया गया। तय हुआ कि मंगलवार को क्षेत्र पंचायत सदस्यों की बैठक बुलाई गई है,जिसमें ब्लॉक प्रमुख मनोज राय अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। सदस्यों की मंशा के अनुरूप मनमोहन पांडेय को ब्लॉक प्रमुख बनाने में सभी एक साथ होंगे। विकास ही सभी की प्राथमिकता है, ऐसे में विधायक निधि से उन्होंने बीस लाख देने की घोषणा की। साथ ही कहा कि सदस्यों की राय से विकास का प्रस्ताव तैयार होगा और क्षेत्र का विकास कराया जाएगा। प्रेस वार्ता में मौजूद ब्लॉक प्रमुख मनोज राय ने कहा कि विकास के मुद्दे पर हर समझौता मानने को तैयार हैं। तय समय पर वह अपना इस्तीफा सौंप देंगे। जबकि क्षेत्र पंचायत सदस्य मनमोहन पांडेय ने कहा कि आपसी सहमति बन जाने की वजह से अविश्वास प्रस्ताव की बैठक में कोई सदस्य नहीं गया। इस दौरान जयराम पांडेय, वृजभूषण पांडेय, प्रवीन मिश्रा आदि लोग उपस्थित रहे।
इंतजार करते रहे अधिकारी, नहीं पहुंचे सदस्य
संतकबीरनगर। ब्लॉक प्रमुख खलीलाबाद मनोज राय के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर गुरुवार को एसडीएम सदर सदर उमेश चंद्र निगम की अध्यक्षता में ब्लॉक सभागार में पूर्वाह्न साढ़े ग्यारह बजे से सदस्यों की बैठक और मतदान होने का कार्यक्रम तय था। प्रशासन की तरफ से तैयारी पूरी की गई थी। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस भी मुस्तैद थी,लेकिन निर्धारित समय साढ़े ग्यारह बजे से डेढ़ बजे के बीच कोई सदस्य नहीं पहुंचा। इधर, अंदरुनी तरीके से दोनों पक्षों में समझौता हो गया था, जिसकी भनक तक प्रशासन को नहीं लग पाई। एसडीएम ने बताया कि एक भी सदस्य नहीं पहुंचा,जिसकी वजह से अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हुई। इधर दोनों खेमें के एक होने और फिर अविश्वास प्रस्ताव को नाटकीय ढंग से टाल देने को लेकर लोगों के बीच तमाम तरह की चर्चा हो रही थी।