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डेंजर लाइन से राप्ती 90 सेमी, बूढ़ी राप्ती डेढ़ मीटर ऊपर

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सिद्धार्थनगर। जिले की नदियों में भले ही जलस्तर गिर रहा है, पर अभी भी जिले की चार नदियां डेंजर लाइन(लाल निशान) से ऊपर बह रहीं हैं। राप्ती 90 सेमी, तो बूढ़ी राप्ती डेढ़ मीटर ऊपर बह रही है। उसका रेलवे पुल के पास कूड़ा नदी एक मीटर से ऊपर है तो नगर से सटा जमुआर नाला का जलस्तर अभी भी उच्चतम बाढ़ स्तर के लेबल से अधिक बना हुआ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार बाढ़ से जिले के 671 गांव प्रभावित हैं। इसमें चौतरफा पानी से घिरे गांवों की संख्या 350 है। 12 अगस्त से सैलाब की चपेट में आए जिले की छह में से चार नदियों में पानी लाल निशान के ऊपर होने से बाढ़ की विभिषिका कम होने का नाम नहीं ले रही। नदियाें का पानी घट तो रहा है, लेकिन इसकी रफ्तार बेहद सुस्त है। मंगलवार शाम से बुधवार की सुबह तक राप्ती के जलस्तर में सात सेमी तक की कमी आई है। बूढ़ी राप्ती 17 सेमी तक घटी है। प्रशासन के मुताबिक जिले की 309023 आबादी व 44650 पशु बाढ़ से प्रभावित हैं। राहत व बचाव कार्य के लिए 47 बाढ़ चौकी, 11 राहत शिविर व 17 राहत वितरण केंद्र संचालित हैं। एनडीआरएफ और पीएसी की तीन-तीन टीमें राहत कार्य में लगी हुई हैं। 235 नाव और 13 मोटर बोट संचालित हैं। डीम कुणाल सिल्कू ने बाढ़ राहत में लगाए गए अफसर-कर्मचारियों को पूरी सतर्कता और पारदर्शिता के साथ कार्य करने का निर्देश दिया है। कहा कि प्रभावित गांवों में निरंतर राहत सामग्री का वितरण होता रहे। कहीं से किसी भी प्रकार की शिकायत मिली तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बाढ़ का जलस्तर नीचे आने के बाद बंधों के मरम्मत के कार्य में तेजी लाई जा सकेगी। जनपद में बाढ़ की स्थिति अब धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। जिला प्रशासन निरंतर बाढ़ प्रभावित गांवों में फंसे ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और उनके रहने-खाने की व्यवस्था की जा रही है।
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70 हजार परिवार पीड़ित, 30 हजार तक पहुंची मदद
प्रशासन ने खुद माना है कि बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में आधे परिवारों तक भी अभी राहत सामग्री नहीं पहुंच सकी है। जिले के 70 हजार परिवार बाढ़ प्रभावित हैं, इनमें 30 हजार परिवारों तक खाद्यान्न व राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। जिला प्रशासन ने दावा किया है कि अगले चार दिनों के अंदर अन्य परिवारों तक भी राहत सामग्री पहुंचा दी जाएगी।
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