गाहासाड़-उत्तरी कोलिया बांध के घुनघुन कोठा में टूटने से डोमिनगढ़ से गाहासाड़ के बीच आठ किलोमीटर क्षेत्र के 13 गांवों के करीब दो लाख लोग प्रभावित हुए हैं। स्थिति की भयावहता देख बुलाई गई सेना ने सोमवार सुबह राहत एवं बचाव का काम शुरू किया। डीएम राजीव रौतेला और एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने सेना की टीम के साथ बाढ़ग्रस्त इलाकों की स्थिति देखी और सभी जरूरतमंदों को राहत पहुंचाने का भरोसा दिया। हालांकि इस दौरान काफी संख्या में लोगों ने राहत सामग्री नहीं मिलने पर नाराजगी भी जताई।
रविवार सुबह करीब चार बजे घुनघुन कोठा में बांध टूटने के बाद डोमिनगढ़ से गाहासाड़ के बीच उत्तरी कोलिया, घुनघुन कोठा, मंझरिया, उतरासोठ, टिकरिया, बेला, जगतबेला, महम्मदपुर माफी, मंझगांव जमुआरे, खरबुजहवा आदि गांव में ‘जलप्रलय’ वाली स्थिति हो गई है। पूरे गांव में आठ से 10 फीट तक पानी भरा हुआ है। ज्यादातर घरों का एक मंजिल मकान पूरी तरह से डूबा हुआ है। लोग छतों पर शरण लिए हुए हैं। सोमवार को करीब 36 घंटे बाद भी हालात में कोई सुधार नहीं हुआ। अलबत्ता लोगों की दिक्कतें और बढ़ती जा रही है। हालांकि सेना के कमान संभालने के बाद बाढ़ पीड़ितों को राहत मिलनी शुरू हो गई।
सोमवार को 25-30 घंटे से भूख-प्यास से बेहाल लोगों को सेना के राहत एवं बचाव दल ने खाद्य सामग्री बांटी। डीएम राजीव रौतेला ने कहा कि घुनघुन कोठा में बांध टूटने से करीब दो लाख लोग प्रभावित हुए हैं। सभी प्रभावितों तक राहत पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। जो लोग अपने घर से बाहर निकलना चाहते हैं, उन्हें रेस्क्यू किया जा रहा है और जो गांव में ही रुकना चाहते हैं, उन्हें खाने पीने की सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने कहा कि बाढ़ पीड़ितों की सुरक्षा के लिए पुलिस पूरी तरह से मुस्तैद है। जो भी लोग बांध पर या रेलवे ट्रैक के किनारे रह रहे हैं, उनकी सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
73 सदस्यीय सेना की टीम ने संभाली कमान
मंझरिया, गुनगुनकोठा आदि गांवों के जलमग्न होने के बाद राहत एवं बचाव के लिए पहुंची 4 रैपिड डिवीजन, 9 रैपिड इंजीनियर और 4 रैपिड सिग्नल रेजीमेंट में 3 ऑफिसर, 5 जेसीओ और 64 जवान समेत कुल 73 सदस्य हैं। आते ही चार बोट के सहारे सेना के जवान लोगों को राहत पहुंचाने में जुट गए।
अन्य जगहों से मंझरिया, गुनगुन कोठा स्थिति ज्यादा भयावह
लेफ्टिनेंट कर्नल आशीष राव ने बताया कि सेना गोरखपुर में 18 अगस्त से विभिन्न बाढ़ग्रस्त इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य कर रही है, लेकिन गुनगुन कोठा में बांध के कटने से प्रभावित इलाकों की स्थिति ज्यादा भयावह है। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि अधिकांश लोग घर छोड़कर आना नहीं चाहते। लोग कह रहे हैं कि घर बंद करके जाएंगे तो चोरी हो जाएगी, मवेशियों को खाना कौन खिलाएगा। ऐसे परिवारों के बीच खाद्य सामग्रियों के अलावा पर्याप्त मात्रा में पानी बांटा जा रहा है।
सेना ने 30 लोगों को गांव से बाहर निकाला
लेफ्टिनेंट कर्नल आशीष राव के नेतृत्व में सेना ने विभिन्न गांवों में फंसे 30 लोगों को बाहर निकाला। वहीं करीब 2500 लोगों के बीच राहत सामग्री बांटी। सुबेदार विजय लहरी ने बताया कि इसमें एक बुजुर्ग महिला प्रभावती के अलावा कुछ बच्चों को भी बाहर निकाला गया।
बाढ़ के साथ बीमारियों ने पांव पसारा
जलमग्न हो चुके इन गांवों में अब बीमारी ने भी पांव पसारना शुरू कर दिया है। सोमवार को सेना की ओर से लगाए गए हेल्थ कैंप में आसपास के करीब 500 लोग इलाज के लिए पहुंचे। आर्मी के मेडिकल ऑफिसर कैप्टन एसके पांडेय ने कहा कि बाढ़ की वजह से लोगों को पीने का साफ पानी नहीं मिल पा रहा है। कैंप में उल्टी, दस्त, डायरिया, पीलिया के मरीज काफी संख्या में आ रहे हैं। अगर इनके लिए साफ पानी के टैंकर की व्यवस्था हो जाती है तो यह काफी राहत देने वाली बात साबित होगी। कैंप में आने वाले ऐसे बुजुर्ग की संख्या भी काफी है जो ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, गठिया आदि की दवा नहीं ले पा रहे हैं। ऐसे मरीजों को दवा दी जा रही है।
नाव पर प्रधान का कब्जा का आरोप
मंझरिया गांव के लोगों ने गांव के प्रधान पर नाव पर कब्जा कर अपने पास रखने का आरोप लगाया है। महेंद्र यादव ने कहा कि मां की तबीयत खराब थी, प्रधान से नाव मांगा तो उन्होंने दिया नहीं। केवल अपने परिचितों को ही उपलब्ध कराते रहे। उत्तरी कोलिया के सुभाष ने कहा किप्रधान ने नाव को अपने कब्जे में ले रखा है। मांगने पर कहते हैं कि खुद ही खरीद लो। उतना पैसा नहीं है, लिहाजा एक ट्यूब खरीद लिया है। गांव के काफी संख्या में लोगों ने ट्यूब खरीदी है।
आपदाओं से निपटने में माहिर होती है सेना की इंजीनियरिंग विंग
इलाहाबाद से गोरखपुर पहुंची सेना की टीम बाढ़ग्रस्त इलाकों में राहत पहुंचाने में पूरे जोरशोर से लगी हुई है। दरअसल आर्मी की इंजीनियरिंग विंग आपदाओं से निपटने में माहिर होती है। आर्मी यह विंग बाढ़ के अलावा भूकंप समेत अन्य आपदाओं में तत्काल राहत पहुंचाने में निपुण होती है। इस विंग की एक और खासियत यह है कि अगर कहीं पुल बनाने की नौबत आती है तो कुछ ही घंटों में ऐसा पुल बनाकर तैयार कर दिया जाता है, जिससे भारी से भारी वाहन भी आसानी से गुजर सकते हैं।