गोरखपुर।
अब ट्रेनों के एसी कोच में सफर करने वाले यात्रियों को भारी-भरकम कंबल की जगह लोई (ऊनी चादर) दी जाएगी। वजन में हल्की होने से इसके इस्तेमाल में भी सहूलियत रहेगी, साथ ही रेलवे को धुलाई में भी आसानी होगी। हमसफर एक्सप्रेस के यात्रियों को इसका लाभ मिलने लगा है। जल्द ही कुछ और ट्रेनों में यह सुविधा शुरू की जाएगी। एक लेई की कीमत 562 रुपये है, रेल प्रशासन ने खादी ग्रामोद्योग से इसकी खरीद की है।
यात्रियों को बेडरोल सेट में चादर, तकिया, कंबल, तौलिया दिया जाता है। कंबल का वजन अधिक होने के चलते अक्सर ओढ़ने में यात्रियों को दिक्कत महसूस होती है। कभी-कभी सोते वक्त कंबल वजनी होने के कारण सीट से नीचे गिर जाता है। वहीं कंबल को धुलाई के बाद सुखाकर मैकेनाइज्ड लांड्री से ट्रेन में पहुंचाना भी आसान नहीं होता है। लेकिन लोई को पहुंचाना कर्मचारियों के लिए भी सहूलियत भरा होगा।
यात्रियों से बेहतर रिस्पांस
हमसफर एक्सप्रेस गोरखपुर से सप्ताह में तीन दिन चलती है। इसमें मैकेनाइज्ड लांड्री से 1480 लोई उपलब्ध कराई जाती है। रेलवे बोड के निर्देश पर रेल प्रशासन ने यात्रियों से फीड बैक लिया है। हर कोच के 10-10 यात्रियों से कंबल की जगह लोई के इस्तेमाल के बारे में पूछा गया, जिसमें यात्रियों ने इसे बेहतर बताया। फीड बैक को रेल प्रशासन ने रेलवे बोर्ड को भेजकर कुछ अन्य ट्रेनों में इस सुविधा को शुरू करने की अनुमति मांगी है।
कोट
हमसफर एक्सप्रेस में लोई (ऊनी चादर) के प्रयोग का बेहतर रिस्पांस यात्रियों से मिला है। इसकी रिपोर्ट रेेलवे बोर्ड को भेजी गई है। बोर्ड से मंजूरी मिलते ही कुछ और ट्रेनों में यह सुविधा शुरू की जाएगी।
संजय यादव, सीपीआरओ एनईआर