गोरखपुर।
वित्तविहीन प्रबंधक संघ की शैक्षणिक विचार विमर्श गोष्ठी हुई। इसमें पदाधिकारियों ने संगठन की एकता पर बल दिया और मान्यता को लेकर जटिल नियमों की आड़ में अधिकारियों की हठधर्मिता का विरोध करने का निर्णय लिया।
मुख्य वक्ता मस्तराज शाही ने कहा कि पूर्वांचल में वित्तविहीन स्कूलों में सीमित संसाधनों में बेहतर अध्यापन कार्य किया जा रहा है। इसके बावजूद सरकार कड़े नियम बनाकर तमाम अड़चनें पैदा कर रही है। उन्होंने सरकार से मान्यता के नियमों को सरल बनाकर अधिकारियों की मनमानी रोकने की मांग की। प्रबंधक राम कृपाल भारती ने कहा कि सरकार करोड़ों रुपये खर्च करके वित्तविहीन स्कूलों जैसी गुणवत्तापरक शिक्षा नहीं दे पा रही है। राष्ट्रीय स्वरोजगार महासंघ के अध्यक्ष गोस्वामी गौरव भारती ने कहा कि अगर सरकार ने निजी विद्यालयों पर तानाशाही कर बंद करने की कार्रवाई की तो बच्चे बेहतर शिक्षा से वंचित हो जाएंगे। इसे किसी भी सूरत में बर्दास्त नहीं किया जाएगा।
संगोष्ठी में महफूज खान, राजेश गौतम, जीतेंद्र निषाद, अनंत कुमार, भोला प्रसाद, रमेश यादव, मोहन पाल, राजन उपाध्याय, जय प्रकाश मिश्रा, कमलेश पाठक, प्रेम शंकर मणि त्रिपाठी, राजेंद्र शुक्ल आदि मौजूद रहे।