अपना दर्द साझा करने वीना अमर उजाला दफ्तर जरूर पहुंचीं लेकिन बदनामी का डर उन्हें सताता रहा। बोलीं, मेरा नाम, फोटो छाप लीजिए लेकिन बेटी का नहीं। उसे नहीं पता कि मैं रकम जुटाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही हूं। वह सुबह काम पर जाती है, फिर मैं रकम जुटाने के लिए निकल जाती हूं।
बेटी की कमाई से चल रहा खर्च
पति से तलाक के बाद वीना ने प्राइवेट विद्यालय में पढ़ाना शुरू किया। तब बेटी पांच साल की थी। कड़ी मेहनत से उन्होंने बेटी को पढ़ाया। अब वीना की नौकरी छूट गई है। हालांकि जिस बेटी की शादी तय हुई है, वह गोलघर स्थित एक कपड़े की दुकान में काम करती है। महीने में उसे करीब पांच हजार रुपये मिलते हैं। 1500 रुपये मकान के किराये में चले जाते हैं। 3500 रुपये में खाना, कपड़ा सहित अन्य व्यवस्थाएं करनी पड़ती हैं।
अकेले रहने को भी तैयार हैं वीना
बेटी की शादी के बाद वीना अकेले रहने को तैयार हैं। वह कहती हैं कुछ छोटा-मोटा काम करके रह लूंगी। बेटी अच्छे से रहे, बस यही तमन्ना है। जिस लड़के से शादी तय हुई है, वह दिल्ली में जॉब करता है। शादी के बाद बेटी भी दिल्ली में रहेगी। यह सोचकर मन को शांति मिलती है। सच्चिदानंद का बिछिया में मकान है, जिसमें किरायेदार रहते हैं।