गोरखपुर। उद्योगपति या व्यापारी अब अपने प्रतिष्ठानों में कार्यरत कर्मचारियों का शोषण नहीं कर सकेंगे। अपने सभी कर्मचारियों का वेतन उन्हें अब कर्मचारियों के बैंक खातों में भेजना होगा। इसमें कोताही पर प्रतिष्ठान मालिक के खिलाफ मुकदमा होगा। सरकार ने मजदूरों और कर्मचारियों के वेतन भत्तों के भुगतान में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया है।
कई प्रतिष्ठान कर्मचारियों को मानक के अनुरूप भुगतान नहीं कर रहे थे। लगातार इस तरह की शिकायत को देखते हुए सरकार ने वेतन संदाय अधिनियम एवं न्यूनतम वेतन अधिनियम की विभिन्न धाराओं में संशोधन कर दिया गया है। नये प्रावधान के अनुसार अब सभी वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को उनके कर्मचारियों का वेतन अब चेक, आरटीजीएस, निफ्ट या अन्य किसी भी माध्यम से सीधे कर्मचारियों के बैंक खाते में देना होगा। उप श्रमायुक्त एके सिंह ने बताया कि ऐसा नहीं करना अधिनियम के अंतर्गत अपराध होगा और उल्लंघन करने पर सेवायोजक के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाएगी।
तीन महीने में एक बार पांच हजार रुपये दे सकते हैं नकद
उप श्रमायुक्त ने बताया कि कर्मचारी या मजदूर पैसे की तत्काल जरूरत पर तीन माह में एक बार पांच हजार तक नकद भुगतान ले सकते हैं। इसके लिए उन्हें अपने नियोजक को लिखित आवेदन देना होगा। साथ ही आधार कार्ड की स्वप्रमाणित फोटो कॉपी भी देनी होगी।