फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्पेशल ट्रेनों की लोकल चाल, रूटीन भी बेपटरी

Sat, 05 May 2018 01:09 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
विज्ञापन
train
विज्ञापन

ट्रेनों की सुस्त चाल ने यात्रियों की दिनचर्या बिगाड़ के रख दी है। हालत यह है कि यदि किसी को शादी में जाना है तो वह विदाई के समय पहुंच रहा है। सभी ट्रेनें पांच से आठ घंटे देरी से पहुंच रही हैं। स्पेशल ट्रेनों की लोकल चाल ने यात्रियों की मुश्किलें तो बढ़ाई ही हैं, सुपरफास्ट ट्रेनों का भी कोई तय समय नहीं रह गया है। ट्रेनों की लेटलतीफी के कारण लोग समय से मंजिल पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। जरूरी काम छूट जा रहे हैं। जिस हमसफर एक्सप्रेस को रोजाना चलाने के लिए रेल राज्यमंत्री शनिवार को हरी झंडी दिखाने आ रहे हैं, वह भी यात्रियों की बेहतर हमसफर नहीं बन पा रही है। ज्यादा किराया देने के बाद भी यात्री देरी से ही अपने गंतव्य पर पहुंच रहे हैं।

विज्ञापन

केस एक

आनंद विहार-गोरखपुर स्पेशल ट्रेन से शुक्रवार को रवि राय पत्नी और बच्चों के साथ सहारनुपर से चले। उन्हें गोरखपुर में एक वैवाहिक कार्यक्रम में भाग लेना था। ट्रेन शाम को साढ़े पांच बजे पहुंचनी थी लेकिन पहुंची पांच घंटे की देरी से साढ़े दस बजे। रवि का कहना है कि उनका पूरा शेड्यूल खराब हो गया। देर रात वह कार्यक्रम में पहुंचेंगेे। ट्रेन विलंब से पहुंचेगी, इसका पता रहता तो बस से ही यात्रा कर लेता।

केस दो

गोला इलाके के सागर चंद रिश्तेदार का इलाज कराने तीन मई को वैशाली एक्सप्रेस से नई दिल्ली निकले। उन्हें शुक्रवार दोपहर अपोलो अस्पताल में डॉक्टर ने चेकअप का समय दिया था। ट्रेन गोरखपुर स्टेशन पर ही ढाई घंटे देर से आई और करीब नौ घंटे की देरी से शाम साढ़े तीन बजे दिल्ली पहुंची। जब तक वह अस्पताल पहुंचे, डॉक्टर जा चुके थे। सागर चंद का कहना है कि अब उन्हें एक दिन और रुकना पड़ेगा, अगर डॉक्टर ने देख लिया तो ठीक है वरना पूरी यात्रा बेकार हो जाएगी।


समय पालन में पिछड़ा पूर्वोत्तर रेलवे
ट्रेनों को समय से चलाने में पूर्वोत्तर रेलवे पिछड़ गया है। अमूमन 70 से 80 फीसदी ट्रेनों को समय से चलाने वाले पूर्वोत्तर रेलवे में 60 फीसदी तक समय पालन नहीं हो पा रहा है। गुरुवार को समय पालन 57 फीसदी दर्ज की गई।
विज्ञापन


खीज कर दी पांचवीं रैंक
रुस्तमपुर निवासी अतुल के मोबाइल फोन पर सुबह दस बजे घंटी बजी। फोन भारतीय रेलवे की तरफ से था। उधर से रेलवे की कैटरिंग व्यवस्था और ट्रेनों के समय पालन पर उनसे राय मांगी गई। इसके लिए बेहतर व्यवस्था के आधार पर एक से पांच तक रैंक देने को कहा गया। अतुल के परिवार के एक सदस्य ने गुरुवार को वैशाली एक्सप्रेस से यात्रा की थी, ट्रेन के घंटों विलंब के चलते उनका अनुभव बहुत खराब रहा। खीज कर उन्होंने कैटरिंग पर चार और समय सारिणी पर सबसे कम पांचवीं रैंक दी।

इस महीने भी देरी से पहुंची इंटरसिटी
गोरखपुर-लखनऊ इंटरसिटी एक्सप्रेस अब भी समय से संचालित नहीं हो पा रही है। यह ट्रेन अप्रैल में हर दिन लखनऊ से देर पहुंची, इस महीने भी देर से पहुंच रही है। शुक्रवार को यह ट्रेन लखनऊ से 1.42 घंटे देरी से आई। इस ट्रेन से अधिकांश कामकाजी लोग और पीजीआई में इलाज कराने वाले लोग यात्रा करते हैं। समय से ट्रेन के नहीं पहुंचने पर यात्रियों की योजना खराब हो जा रही है।
विज्ञापन


शुक्रवार को देर से चलने वाली ट्रेनें
ट्रेन विलंब
वैशाली एक्सप्रेस 3.08
एलटीटी-गोरखपुर एक्सप्रेस 2.34
चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस 6.12
आनंद विहार-गोरखपुर स्पेशल 6.30
कुशीनगर एक्सप्रेस 4.02
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें