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"...मानव होना भाग्य है कवि होना सौभाग्य"

Mon, 20 Nov 2017 12:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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रैंपस स्कूल में कवि सम्‍मेलन का आयोजन किया गया। - फोटो : Amar Ujala
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रैम्पस स्कूल के सभागार में जुटे काव्य प्रेमियों के लिए रविवार की शाम यादगार हो गई। पद्म विभूषण से सम्मानित मशहूर गीतकार कवि गोपालदास नीरज की अध्यक्षता में हुए कवि सम्मेलन को धुरंधर कवियों ने अपनी रचनाओं से गुलजार किया। स्कूल के संस्थापक प्रेमचंद श्रीवास्तव की स्मृति में हुए इस आयोजन में गोपालदास नीरज को प्रेमचंद श्रीवास्तव स्मृति काव्य रत्न सम्मान से नवाजा गया।
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संचालन करते हुए आशुकवि राजेश राज ने अपने दोहे से वरिष्ठ कवि गोपालदास नीरज को नमन किया। पढ़ा, ‘प्रश्न किसी से कीजिए रह जाएगा मौन, गीतों के संसार में नीरज जैसा कौन।’ इसके बाद मंच पर आए केशव पाठक सृजन ने सुनाया, ‘नई दुनिया बनाओ या तलाशो, यहां तो दम निकलता जा रहा है।’ निशा राय ने ‘घिरी आज पलकों में फिर से घटाएं, कलम कह रही है चलो गुनगुनाएं’ गीत गाया तो हर ओर तालियां गूंज उठीं। प्रीति प्रियांशी ने सामाजिक सरोकारों पर अपनी रचना पढ़ी। सुनाया, ‘नफस-नफस में घुल करके जादू सा असर करते हैं, लांघ के मन की देहरी तुम तक शब्द सफर करते हैं’।

कमल आग्नेय ने भी खूब वाहवाही बटोरी। उन्होंने ओज के साथ पढ़ा, ‘केश जो महेश के विशेष खुलते न यदि, भगीरथी भाग्य वेग शेष नहीं होता जी’। मशहूर शायर कलीम कैसर ने पढ़ा, ‘इश्क ऐसी जबान है प्यारे, जिसे बूढ़ा भी बोल सकता है।’ प्रियांशु गजेंद्र ने अपनी कविता से लोगों को भावविभोर कर दिया। सुनाया, ‘इतने निर्मोही सजन कैसे हो गए, किसकी बाहों में जाकर मगन हो गए।’ सुदीप भोला ने सुनाया, ‘नकदी बंद करा दी कैसे होती शादी, दूल्हा-दुल्हन दोनों के सपनों की वाट लगा दी।’ राजेश राज ने अपनी पंक्तियों कवि की वेदना व्यक्त करते हुए कहा, ‘लगा दी सारी उम्र कविता को सजाने में, संभाला मंच को जब सब लगे गिराने में।’
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जब गोपालदास नीरज के काव्य पाठ की बारी आई तो उनके सम्मान में पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। उन्होंने पढ़ा, ‘आत्मा के सौंदर्य का शब्द रूप है काव्य, मानव होना भाग्य है कवि होना सौभाग्य।’
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