गोरखपुर यूनिवर्सिटी से संबद्ध निजी डिग्री कॉलेजों के बीए, बीएसी और बीकॉम फर्स्ट ईयर की सीटें संयुक्त प्रवेश परीक्षा से भरी जाएंगी। यह मामला परीक्षा समिति को भेज दिया गया है। जून 2018 से पहले परीक्षा समिति इस मामले में अंतिम फैसला लेगी। यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो शैक्षिक सत्र 2018-19 से ग्रेजुएशन फर्स्ट ईयर की सभी सीटें सिंगल एंट्रेंस टेस्ट से भरी जाएंगी। इससे छात्र-छात्राओं के अलग-अलग कॉलेजों के फार्म भरने और दौड़भाग करके दाखिला लेने की झंझट खत्म हो जाएगी।
यूनिवर्सिटी से संबद्ध निजी डिग्री कॉलेजों की शैक्षिक, शोध की गुणवत्ता में सुधार को गठित तीन सदस्यीय (रजिस्ट्रार शत्रोहन वैश्य, परीक्षा नियंत्रक डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह और वित्त अधिकारी वीरेंद्र चौबे) टीम ने शनिवार (28 अक्तूबर) को रिपोर्ट दे दी है। कमेटी ने राजकीय, अनुदानित और निजी डिग्री कॉलेजों के स्वकेंद्र परीक्षा प्रणाली को खत्म करने की पहल को सही बताया है। साथ ही कहा है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है। जनवरी 2018 तक इस पर अंतिम फैसला होगा। यूनिवर्सिटी और संबद्ध कॉलेजों में एडमिशन की आखिरी डेट 14 अगस्त तय की गई है। मनमाने एडमिशन पर परीक्षा देने की अनुमति नहीं मिलेगी। बीए, बीएससी और बीकॉम फर्स्ट ईयर में 60 की जगह 80 सीट पर एडमिशन का फैसला फिलहाल टाल दिया गया है। इस मामले को कमेटी ने प्रवेश समिति के पास भेजा है।
महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. प्रदीप राव ने बताया कि कॉलेजों का एडमिशन से संबंधित डाटा 20 अगस्त तक वेबसाइट पर अपलोड किया जाना है। कमेटी के फैसले की जानकारी सभी कॉलेजों को मिली है। इसके मुताबिक परीक्षकों का डाटा बेस बनाने का फैसला हुआ है। साथ ही परीक्षकों की ड्यूटी सॉफ्टवेयर की मदद से लगाने का निर्णय लिया गया है।
तीन महीने में शिक्षकों की नियुक्ति
निजी कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया सरल कर दी गई। अब नियुक्ति की अनुमोदन प्रक्रिया तीन महीने में पूरी करनी होगी। इस काम में लापरवाही पर संबंधित अधिकारी या फिर कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यूनिवर्सिटी प्रशासन हर साल 15 से 30 जून तक एडमिशन की सारी जानकारी संबद्ध डिग्री कॉलेजों के प्रिंसिपल को उपलब्ध कराएगी। आब्जेक्टिव पेपर की परीक्षा स्थगित करने का प्रस्ताव सिरे से खारिज कर दिया गया। तीन सदस्यीय कमेटी ने कहा कि यह व्यवस्था पहले की तरह लागू रहेगी। शिक्षकों की सेवा शर्तों में सुधार का मामला एक कमेटी को दिया गया है। क्रीडा परिषद में निजी कॉलेजों को प्रतिनिधित्व देने का अधिकार कुलपति प्रो. वीके सिंह पर छोड़ा गया है।