गोरखपुर। बिजली विभाग तीन अरब रुपये से ज्यादा खर्च करके भी गोरखपुर में आपूर्ति में सुधार नहीं कर सका, जबकि दावे बड़े-बड़े किए गए थे। कहने को विभाग के पास न तो बजट की कमी है और न ही संसाधन की, इसके बावजूद बिजली आपूर्ति का न सुधरना यह दर्शाता है कि काम में लापरवाही हो रही है। कायदे से तो मरम्मत का काम अप्रैल माह में खत्म कर लिया जाना चाहिए था, लेकिन यह अब भी चल रहा है। इसके बदले कभी किसी मुहल्ले की तो कभी कहीं की बिजली घंटों काट दी जा रही है। यह हाल सीएम के शहर का है।
शासन की तरफ से बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए बिजनेस प्लांट में दो करौड़ करोड़, व्यापार विकास निधि में 100 करोड़, स्काडा योजना में 88 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। अधिकारियों का दावा है कि इस रकम से खंभे और तार बदले गए। ट्रांसफार्मरों और उपकेंद्रों की क्षमता वृद्धि की गई। इसके बावजूद आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक में कई जगह काम के दौरान खानापूर्ति की गई। तारामंडल उपकेंद्र की सिद्धार्थनगर कॉलोनी, बरगदवां, सूरजकुंड आदि इलाकों में कहीं ट्रांसफार्मर लगाकर विभाग भूल गया तो कहीं तार बदलने में लापरवाही की गई।
समीक्षा में निकली थीं खामियां
तारों की मरम्मत से लेकर सभी तरह के सुधार कार्यों का जिम्मा स्काडा के पास था। विभाग ने जब कराए गए कार्मों की समीक्षा की तो सौ से ज्यादा खामियां सामने आईं। सूत्रों की मानें तो कई इलाकों में लगाए गए उपकेद्रों में पैनल और ब्रेकर जल गए। मुख्य अभियंता एके सिंह ने जब शहरी व ग्रामीण इलाकों में लचर बिजली व्यवस्था की समीक्षा की थी तो कहीं पैनल और कहीं ट्रांसफार्मर के ब्रेकर मानक के अनुरूप नहीं मिले। उन्होंने संबंधित फर्म को 50 से ज्यादा जगह पैनल व ब्रेकर बदलने का आदेश दिया था।
त्यौहार के दिन भी कई इलाके में रहा अंधेरा
दशहरा के मद्देनजर विभाग ने दावा किया था कि 29 व 30 सितंबर को जिले में निर्बाध बिजली सप्लाई होगी, मगर ऐन दशहरे के दिन भी कई इलाकों में लोग घंटों बिजली कटौती से परेशान रहे। रुस्तमपुर उपकेंद्र के मानसपुरम इलाके में ट्रांसफार्मर में तकनीकी खराबी से घंटों बिजली गुल रही। वहीं बक्शीपुर, टाउनहाल उपकेंद्र के खूनीपुर, कोतवाली, अस्करगंज, जगन्नाथपुर, मुफ्तीपुर आदि कई इलाकों में मूर्ति विसर्जन के नाम पर घंटों कटौती की गई।