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मे डिकल कॉलेज में मौतों के आंकड़ों में खेल, गर्दन बचा ले गए अफसर

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गोरखपुर।
मेडिकल कॉलेज में 50 से ज्यादा मौतों पर कार्रवाई की जगह सच छिपाने के लिए आंकड़ों में खेल होता रहा। शुक्रवार की पूरी रात डेथ सर्टिफिकेट को लेकर माथापच्ची हुई। फिर बीएचटी में खेल करके मनचाही वजह बता दी गई। ज्यादातर मौतों की वजह इंसेफेलाइटिस को बताकर बड़े सलीके से अफसर खुद की गर्दन फंसने से बचा ले गए। बड़ी बात यह कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने जिन दो मंत्रियों को समीक्षा के लिए भेजा, वह भी प्रशासन के आंकड़ों की बाजीगरी में उलझ कर रह गए और एक तरह से जिला प्रशासन को क्लीन चिट देने जैसे ही बयान देकर लौट गए।
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मेडिकल कॉलेज में मौत की वजह बदलने का यह पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी मेडिकल कॉलेज प्रशासन अपने हितों के हिसाब से मौत की वजह बदलता रहा है। करीब तीन साल पहले सीएमओ रहे डॉ. एमपी सिंह ने इस खेल को न सिर्फ पकड़ा था, बल्कि इसकी निगरानी के लिए कमेटी भी बनाई थी, जो रोजाना मेडिकल कॉलेज जाकर उनके द्वारा बताई गई वजह पर सवाल खड़ा करती थी। इसका शासन तक पत्राचार भी किया जाता था। तब साधारण मौतों को भी इंसेफेलाइटिस बताने का मामला पकड़ में आया था। अब ऑक्सीजन की कमी से मौत के बाद भी इंसेफेलाइटिस को ही मौत की वजह दिखाने के लिए पूरी रात डॉक्टर माथापच्ची में लगे रहे और फिर आंकड़ों का ऐसा जाल बुना गया कि दो मंत्री भी उसमें उलझ गए। जिस तरह से स्वास्थ्य मंत्री ने बयान दिया, उससे एक बात तो साफ हो गई कि लापरवाह जिला प्रशासन के अफसरों पर फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं होने वाली है।
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