महराजगंज/परसामलिक। महाव नाले से हो रही बर्बादी को रोकने की कवायद शुरू हो गई है। कमिश्नर की हिदायत के बाद युद्ध स्तर पर तटबंध की मरम्मत का काम शुरू हो गया है। सिंचाई विभाग के पांच जूनियर इंजीनियरों की टीम महाव नाले के संवेदनशील स्थानों पर काम में जुटी है।
नेपाल के पहाड़ से निकला महाव नाला भारतीय सीमा में जंगल के बाहर तक चौदह किमी सात सौ मीटर बहता है, जबकि जंगल के भीतर यह नाला आठ किमी लंबा है। दो जून को छितवनिता के सामने तटबंध टूट गया था। इससे इलाके में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। पिछले बुधवार को कमिश्नर अनिल कुमार ने टूटे तटबंध का निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने सिंचाई विभाग को महाव नाला के तटबंध को कटान से बचाने और कटान को चौबीस घंटे में दुरुस्त करने की सख्त हिदायत दी थी। कमिश्नर के सख्त रुख को देखते हुए सिंचाई विभाग ने पांच जूनियर इंजीनियरों की देखरेख में महाव नाला के संवेदनशील स्थानों को ठीक कराने का निर्देश दिया है। महाव नाला के अतिसंवेदनशील स्थानों में आठ जगह पर बोरियों में रेत भर कर कटान स्थल पर कार्य किया जा रहा है और कुछ स्थान पर ट्रैक्टर लगा कर तटबंध को बराबर भी किया जा रहा है। महाव नाला के लगभग सोलह स्थान अतिसंवेदनशील हैं। इनमें खैरहवा दूबे, बरगदवा, छितवनिता, देवघट्टी, नारायनपुर और चकरार गांव के सामने आठ स्थान पर कार्य शुरू किया है।
इस संबंध में सिंचाई खंड द्वितीय के एक्सईएन धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि महाव नाला पर पांच जेई की देखरेख में कार्य शुरू किया गया है। किसानों की फसलों की बर्बादी से रोकने के लिए सभी तरह के उपाय किए जाएंगे।