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करमैनी- बेलौली तटबंध जर्जर, सहमे लोग

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मेंहदावल(संतकबीरनगर)। राप्ती नदी के तट पर बने करमैनी- बेलौली तटबंध की हालत जर्जर है। जगह-जगह मौजूद रेनकट व बांध के होल मरम्मत न होने की कहानी स्वयं बता रहे हैं। नौगों में रात्रि निवास के लिए बना टिनशेड जर्जर हो गया है। पिछले कुछ दिनो से हो रही बारिश से बढ़ रहे नदी के जल स्तर से स्थानीय लोगों की नींद गायब है।
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करमैनी- बेलौली 19.200 किलोमीटर लंबा है। इसके प्रारंभिक बिंदु से चार किलोमीटर के बीच तटबंध की ऊपरी सतह पर जल जमाव व कीचड़ है। वहीं जगह-जगह तटबंध में होल व गड्ढे ऐसे हैं कि यदि आने जाने वालों ने ध्यान नहीं दिया तो हादसा तय है। गुरुवार को राप्ती नदी का जल स्तर 76.60 मीटर मापा गया, जबकि डेंजर लाईन 79.50 मीटर हैं। जून-जुलाई 2016 में राप्ती नदी का जल स्तर तेजी से बढ़ा था और डेंजर जोन से 15 सेंटीमीटर ऊपर जल स्तर पहुंचने के बाद तटबंध पर पानी का दबाव काफी पड़ रहा था।
मौजूदा समय में विशुनपुर बांगर में नदी का पानी तटबंध को छूकर गुजर रहा है। करमैनी से नौगों ढाले के बीच तटबंध की हालत काफी खराब है। क्षेत्र के रहने वाले जयराम ने बताया कि नौंगो बालू घाट शुरू होते ही नौगों ढाले से लेकर करमैनी तक बांध काफी खराब हालत में है। बरसात के इस सीजन में तटबंध से पैदल नही गुजरा जा सकता तो वहीं तटबंध से सटे बालू खनन कराने के कारण नदी का जल स्तर बढ़ते ही तटबंध पर खतरा और मंडराने लगेगा।
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लालमोहर ने बताया कि नौगों में नदी के तरफ से बड़े पैंमाने पर डोलू चलवाकर मिट्टी निकाले जाने के कारण नदी का जल स्तर बढ़ते ही तटबंध तक पानी आसानी से पहुंच जाएगा। इसके कारण जर्जर तटबंध नौगों गांव के लिए खतरा उत्पन्न कर सकता हैं। अवर अभियंता अब भी यहां न तो रात्रि निवास कर रहे हैं और न ही बरसात के इस सीजन में तटबंध की देखरेख।
जैशराज ने बताया कि करमैनी बेलौली तटबंध काफी जर्जर हो गया है। कुछ जगहों पर विभाग ने तटबंध को सुरक्षित करने के लिए काम तो कराया है, पर वह नाकाफी हैं। जगह-जगह बंधे पर दरारें पड़ी हुई हैं जो तटबंध की सुरक्षा के लिए खतरनाक हैं। अभी तो जल स्तर काफी नीचे हैं, पर जब जल स्तर बढा तो पानी का दबाव सीधे तटबंध पर पडेगा। ऐसे में बाढ़ की खराब स्थिति को नकारा नही जा सकता हैं। अवर अभियंता वीरेेंद्र यादव ने बताया कि तटबंध पर कटाव निरोधक कार्य किलोमीटर 3.78 के पास कराया गया है। नौगों ढलान से करमैनी के बीच कार्य हुआ था पर बालू घाट चलने के कारण लगातार बालू लोड ट्रैक्टर ट्राली आने जाने के कारण तटबंध गड्ढे में तब्दील हो गया हैं। जिसे ठीक कराने का कार्य किया जा रहा है। तटबंध पर जल स्तर का कोई दबाव नही हैं न ही कही से खतरा हैं। पूरी तरह से तटबंध सुरक्षित है।
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