गोरखपुर। गोरक्ष प्रांत के संगठनात्मक कामकाज की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाजपा सरकार के मंत्री, सांसद और विधायकों को नसीहत भी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधि क्षेत्र में जाकर समय बिताएं और जनता की समस्या सुनें। हर जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र में कार्यालय खोले ताकि जनता से सीधे जुड़ाव और संवाद बना रहे। क्षेत्र की कई छोटी शिकायतें भी शासन तक पहुंचती हैं, जबकि इनका निस्तारण जनप्रतिनिधि स्थानीय स्तर पर भी करा सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने बुधवार को गोरखनाथ मंदिर में गोरक्ष प्रांत के सांसद, विधायक, मंत्री और पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र और यूपी सरकार 100 से ज्यादा जनकल्याणकारी योजनाएं चला रही हैं। ज्यादातर योजनाएं गांव, गरीब, किसान, महिला और युवाओं के लिए हैं। इनका प्रचार-प्रसार करें और जनता के बीच जाकर उपलब्धियां गिनाएं। आगामी लोकसभा चुनाव में भी भाजपा श्रेष्ठ प्रदर्शन करेगी। बूथ, सेक्टर और मंडल स्तरीय संगठन को मजबूत बनाकर कोई भी चुनाव जीता जा सकता है।
केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने भी संगठन को मजबूत बनाने पर जोर दिया। साथ ही कहा कि जनता से सीधा संवाद स्थापित करके सरकार की उपलब्धियां गिनाईं जा सकती हैं। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और उपेंद्र तिवारी सांसद जगदंबिका पाल, कमलेश पासवान, हरीश द्विवेदी और शरद त्रिपाठी ने भी जनता से जुड़ाव पर जोर दिया। गोरक्ष प्रांत के गोरखपुर, संतकबीरनगर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, बस्ती, सिद्धार्थनगर, देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज के जनप्रतिनिधियों ने भी संगठन को मजबूत बनाने का सुझाव दिया।
बैठक में नहीं पहुंचे कई मंत्री, सांसद और विधायक
मुख्यमंत्री की संगठनात्मक बैठक में देवरिया से भाजपा सांसद कलराज मिश्र नहीं पहुंच सके। क्षेत्र के 44 में से आठ विधायक भी नहीं पहुंच सके। गोरखपुर नगर से भाजपा विधायक डॉ. आरएमडी, ग्रामीण से विपिन सिंह, चौरीचौरा संगीता यादव और बांसगांव से भाजपा विधायक डॉ. विमलेश पासवान भी बैठक का हिस्सा नहीं बन सके। इटवा से विधायक सतीश द्विवेदी, बस्ती के कप्तानगंज से विधायक सीपी शुक्ला, श्रीराम चौहान और आजमगढ़ के फूलपुर से विधायक अरुण यादव नहीं आए। तीन में से एक एमएलसी विजयबहादुर पाठक भी नहीं आ सके। मंत्री दारा सिंह चौहान भी बैठक में नहीं पहुंच सके।