सिख पंथ के नवें गुरु तेग बहादुर सिंह के शहीदी दिवस पर गुरुवार को श्रीगुरु सिंह सभा जटाशंकर गुरुद्वारे में सत्संग का आयोजन किया गया। इस मौके पर गुरुद्वारा आए सिख पंथ के लोग गुरु की महिमा सुन भावविभोर हो गए। सबने गुरु के चरणों में शीश नवांकर बलिदान दिवस पर उन्हें नमन किया।
लखनऊ स्थित गुरुद्वारा अहियागंज के ज्ञानी जोगेंद्र सिंह ने गुरु तेगबहादुर को नमन करते हुए कहा कि जब-जब भी दुनिया में धर्म और संस्कृति पर अत्याचार हुआ है। तब-तब किसी न किसी महापुरुष ने अवतरित होकर इंसानियत की रक्षा के लिए सर्वस्व न्योछावर कर दिया। गुरु तेग बहादुर ऐसे ही महान संत और योद्धा थे, जिनकी शहादत गाथा न केवल अविस्मरणीय है बल्कि बार-बार नमन का प्रतीक है। पंजाब के जवंदीकला से पधारे रागी जसप्रीत सिंह राजन ने जत्थे के साथ गुरुवाणी में दर्ज गुरु तेगबहादुर के जीवन दर्शन को सिख पंथ के सामने पेश किया। शौर्य और बलिदान की गाथा सुन संगत ने जयकारे लगाए। इसके बाद हजूरी रागी प्रीतम सिंह और गुरुद्वारा मोहद्दीपुर के रागी सुरजीत सिंह निमाना ने कीर्तन कर माहौल को भक्तिमय कर दिया। गुरुद्वारा प्रबंध समिति ने उन्हें सिरोपा भेंटकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन जगनैन सिंह नीटू और आभार ज्ञापन अध्यक्ष जसपाल सिंह ने किया।
इस अवसर पर संरक्षक निर्मल सिंह, उपाध्यक्ष जतिंदर सिंह कोहली, हरभजन सिंह, मैनेजर रजिंदर सिंह, चरणप्रीत सिंह, परमजीत सिंह, मनजीत सिंह, तेजपाल सिंह, हरप्रीत साहनी, सतपाल सिंह, मनमोहन सिंह, जोगेंद्र सिंह, केशव दास मृगवानी, दौलत राम, नंदलाल लखमानी, जगदीप सिंह, इकबाल सिंह, तेजिंदर सिंह, त्रिलोचन सिंह, बाबा अमर सिंह आदि लोग मौजूद थे।